रीवा के सुंदरजा आम की वैश्विक उड़ान: राष्ट्रीय समाचार से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

रीवा के सुंदरजा आम की वैश्विक उड़ान: राष्ट्रीय समाचार से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
जब किसी क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय समाचारों में सम्मानपूर्वक सुनाई देती है, तो वह केवल एक समाचार नहीं होता, बल्कि उस क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व का क्षण बन जाता है। आज ऐसा ही अवसर तब आया, जब आकाशवाणी, नई दिल्ली के राष्ट्रीय समाचारों में मध्य प्रदेश के रीवा के जीआई टैग प्राप्त सुंदरजा आम के प्रथम वाणिज्यिक निर्यात का समाचार प्रसारित हुआ। रीवा से जुड़े होने के कारण यह समाचार सुनना मेरे लिए विशेष भावनात्मक और गौरवपूर्ण अनुभव रहा।
रीवा का सुंदरजा आम वर्षों से अपनी अद्वितीय मिठास, मनमोहक सुगंध, रेशारहित गूदे और उत्कृष्ट स्वाद के कारण प्रसिद्ध रहा है। अब इसकी गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिलने लगी है। संयुक्त अरब अमीरात के लिए इस आम की पहली वाणिज्यिक खेप का रवाना होना केवल निर्यात की शुरुआत नहीं, बल्कि रीवा की कृषि क्षमता और किसानों की मेहनत को वैश्विक मंच पर पहचान मिलने का प्रतीक है।
इस उपलब्धि में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रीवा जिले के गोविंदगढ़ के प्रगतिशील किसान श्री सोनू गुप्ता द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले सुंदरजा आमों का चयन किया गया। उनकी वैज्ञानिक ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और निर्यात मानकों के अनुरूप पैकेजिंग के बाद खेप को वाराणसी हवाई अड्डे से संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला। स्थानीय बाजार में जहाँ सुंदरजा आम का मूल्य लगभग 100–110 रुपये प्रति किलोग्राम था, वहीं निर्यात के लिए किसानों से लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद की गई। अर्थात किसानों को प्रति किलोग्राम 40–50 रुपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि यदि कृषि उत्पादन गुणवत्ता आधारित और निर्यातोन्मुखी हो, तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
सुंदरजा आम को पहले ही भौगोलिक संकेतक (GI Tag) का दर्जा प्राप्त हो चुका है। यह टैग केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र की पहचान और परंपरा का सम्मान है। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुँचने के बाद यह आम रीवा की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का वैश्विक दूत बनेगा।
राष्ट्रीय समाचारों में रीवा और सुंदरजा आम का उल्लेख यह संदेश भी देता है कि भारत के छोटे शहर और उनके पारंपरिक उत्पाद अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह उपलब्धि केवल एक किसान, एक संस्था या एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे रीवा अंचल की सामूहिक सफलता है।
यह भी आशा की जानी चाहिए कि इस प्रथम वाणिज्यिक निर्यात के बाद सुंदरजा आम की मांग अन्य देशों में भी बढ़ेगी। इससे न केवल रीवा के किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पैकिंग, परिवहन, प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े अनेक नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, मध्य प्रदेश प्रीमियम गुणवत्ता वाले आमों के प्रमुख निर्यातक प्रदेश के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
रीवा के नागरिक होने के नाते मेरे लिए यह क्षण विशेष गर्व का है। राष्ट्रीय समाचारों में अपने क्षेत्र का नाम सुनना आत्मीय प्रसन्नता देता है, और जब वह समाचार विश्व बाजार में पहचान बनाने से जुड़ा हो, तो गर्व कई गुना बढ़ जाता है। विश्वास है कि आने वाले वर्षों में “रीवा का सुंदरजा आम” केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए जाना जाएगा।
रीवा की इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि गुणवत्ता, वैज्ञानिक खेती और उचित विपणन का समन्वय हो, तो स्थानीय उत्पाद भी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकते हैं। सुंदरजा आम की यह वैश्विक उड़ान वास्तव में रीवा के उज्ज्वल भविष्य की नई शुरुआत है।
27 जून 2026
अजय नारायण त्रिपाठी “ अलखू ”