चुनौती को अवसर में बदल आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश गढ़ रहे हैं शिवराज सिंह चौहान

रीवा 21 मार्च 2021. सदी की सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा – कोरोना महामारी, जिसने समूचे विश्व को हिला कर रख दिया, से जूझना तथा उससे प्रदेश को सफलतापूर्वक न्यूनतम हानि के साथ बाहर निकाल ले जाना किसी भागीरथ प्रयास से कम नहीं था। कोरोना महामारी ने जन-स्वास्थ्य को तो प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया ही, प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी। एक ओर हर नागरिक को कोरोना से बचाव व उपचार के लिए नि:शुल्क एवं उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा देना तथा दूसरी ओर लॉकडाउन से ध्वस्त व्यापार, व्यवसाय एवं सेवा क्षेत्र को नवजीवन देने का कार्य वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य जनता जनार्दन की सेवा करना हो।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गत एक वर्ष की अल्प अवधि में यह कार्य कर दिखाया है। उन्होंने गंभीर चुनौती को अवसर में बदला तथा न केवल प्रदेश में कोरोना के संक्रमण को प्रभावी ढंग से रोका, कोरोना पीडि़तों को सर्वश्रेष्ठ इलाज मुहैया कराया, टीकाकरण अभियान का सफल संचालन किया अपितु मृतप्राय अर्थ-व्यवस्था में नवजीवन का संचार भी किया।
23 मार्च 2020 – यही वह दिन था, जिस दिन श्री शिवराज सिंह चौहान को चौथी बार मध्यप्रदेश की बागडोर मिली। कोरोना महामारी ने प्रदेश में पाँव पसार लिए थे और उसकी रोकथाम एवं उपचार की कोई व्यवस्था नहीं थी। श्री शिवराज सिंह चौहान को इस संकट का भली-भांति अंदेशा था। इसीलिए वे शपथ ग्रहण करने के पश्चात सीधे मंत्रालय गए और कोरोना की व्यवस्थाओं के संबंध में बैठक ली। फिर युद्ध स्तर पर कोरोना के संक्रमण को रोकने तथा हर कोरोना पीडि़त को सर्वश्रेष्ठ इलाज देकर स्वस्थ करने का कार्य प्रारंभ हुआ। प्रदेश में आईआईटीटी अर्थात इन्वेस्टिगेट, आईडेंटिफाई, टेस्ट एंड ट्रीट की रणनीति पर प्रभावी ढंग से कार्य किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रत्येक जिले के साथ कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते थे और एक-एक गंभीर मरीज के इलाज की स्वयं मॉनिटरिंग करते थे। उनके लिए हर जान कीमती थी, जिसे वे गँवाना नहीं चाहते थे। परिणाम था कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण, कोरोना रिकवरी रेट का निरंतर बढ़ना और मृत्यु दर का न्यूनतम होना।
लाकॅ डाउन होते ही एक बड़ी समस्या थी, मध्यप्रदेश के मजदूरों का देश के कई राज्यों में फँसा होना और अन्य राज्यों के मजदूरों का मध्यप्रदेश में होना। इन सब के खाने, आवास, दवाइयों आदि की व्यवस्था कोई सरल कार्य नहीं था। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने संकल्प लिया कि हर मजदूर को चाहे वह मध्यप्रदेश का हो अथवा बाहर का, सभी आवश्यक सुविधाएँ दी जाएंगी। रोटी, पानी, आवास से लेकर उनके लिए जूते-चप्पलों तक की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई। मजदूर जहाँ फँसे थे, वहीं उनके खातों में सहायता राशि डाली गई। इसके बाद समय मिलते ही विशेष ट्रेन एवं बसों द्वारा सभी मजदूरों को मध्यप्रदेश वापस लाया गया। साथ ही दूसरे प्रांतों के मजदूरों को मध्यप्रदेश की सीमा पर छोड़ने के लिए भी हजारों की संख्या में बस लगाई गईं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का संकल्प था कि ‘मध्यप्रदेश की धरती पर कोई भूखा नहीं सोएगा तथा कोई भी मजदूर पैदल चलकर अपने घर नहीं जाएगा’। उन्होंने अपने दोनों संकल्पों को शत-प्रतिशत पूरा किया।
तीसरी बड़ी चुनौती थी, किसानों की पक चुकी फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने की। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा था, ऐसे में यह कार्य आसमान से तारे तोड़ने जैसा ही प्रतीत होता था। श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेषता है कि वे कभी हार नहीं मानते। चुनौती जितनी बड़ी होती है उनका हौसला उतना बढ़ता जाता है। समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिये कोरोना संबंधी सभी सावधानियों का पालन करते हुए पूरी व्यवस्था की गई। असंभव दिखने वाला कार्य ऐसा हुआ कि पूरे देश ने उसका लोहा माना। पंजाब राज्य को पीछे छोड़ते हुए मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर सर्वाधिक एक करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की गई। कोरोना संकटकाल में यह उपलब्धि छोटी नहीं थी।

ध्वस्त अर्थ-व्यवस्था में किसानों और मजदूरों को राहत पहुँचाने के बाद अब सरकार का ध्यान उन छोटे-छोटे पथ व्यवसायियों पर गया, जो शहरों एवं गाँव में खोमचे, ठेले लगा कर और फुटपाथ पर बैठकर अपनी आजीविका चलाते थे। इनका काम-धंधा पूरी तरह बंद हो गया था। इनके सामने आजीविका का गहरा संकट था। केंद्रीय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत शहरी पात्र व्यवसायियों को 10-10 हजार रुपए की ऋण व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इसे आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश में न केवल शहरी पथ व्यवसायियों बल्कि ग्रामीण पथ व्यवसायियों के लिए भी बिना ब्याज एवं बैंकों को बिना गारंटी दिए 10-10 हजार रूपये की कार्यशील पूँजी की व्यवस्था की। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त एवं आत्म-निर्भर बनाने के लिए बैंक लिंकेज के माध्यम से उन्हें अत्यंत कम ब्याज दर पर ऋण दिलवाया गया।
इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन की अग्रिम राशि का भुगतान, रसोइयों को मानदेय, विशेष रूप से पिछड़ी हुई जनजातियों को आर्थिक सहायता, विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का भुगतान, लघु वनोपज के समर्थन मूल्य में वृद्धि, निर्माण श्रमिकों को सहायता राशि, संबल योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की सहायता, बच्चों के लिए पोषण आहार की राशि का प्रदाय आदि ऐसे कदम थे, जिन्होंने मृत प्राय अर्थ-व्यवस्था के लिए संजीवनी का कार्य किया। किसानों को केन्द्र सरकार की ओर से मिलने वाली सम्मान निधि की राशि 6 हजार रूपये वार्षिक के साथ मध्यप्रदेश सरकार ने भी 4 हजार अपनी ओर से दिये जाना प्रांरभ किया। इससे किसान सम्मान निधि की राशि बढ़कर 10 हजार रूपये वार्षिक हुई और छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत बनी।
कोरोना के संकट में सभी वर्गों को तात्कालिक सहायता एवं राहत पहुँचाने के बाद अब नंबर था, प्रदेश के विकास एवं प्रगति तथा जनता के कल्याण के स्थाई कार्य करने का। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत की अवधारणा को मूर्तरूप देने के लिए सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोड मैप बनाया गया। इसके चार प्रमुख घटक रखे गए- शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सुशासन, अधोसंरचना विकास तथा अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार। देश भर के विषय-विशेषज्ञों तथा नीति आयोग के सदस्यों से कई दौर की चर्चा के बाद न केवल आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोड मेप तैयार किया गया अपितु उस पर तेज गति से कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया।
शिक्षा एवं स्वास्थ्य में अधोसंरचना विकास, वैलनेस सेंटर्स की स्थापना, उत्कृष्ट जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज अस्पताल, आयुष्मान भारत योजना में प्रत्येक गरीब को 5 लाख रूपये तक का नि:शुल्क इलाज, नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को तत्परता से लागू करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सीएम राइस स्कूल की स्थापना, खेल मैदानों का विकास आदि कार्य किए जा रहे हैं।
पिछले एक साल में सुशासन के लिए जहाँ लोक सेवा गारंटी योजना का विस्तार कर नागरिकों को लोक सेवाओं का प्रदाय आसान किया गया। खसरा-खतौनी की नकल, जाति, आय प्रमाण-पत्र आदि मोबाइल पर ही उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान की गई। वहीं प्रदेश में शांति व्यवस्था के लिए आपराधिक तत्वों पर कड़ा अंकुश लगाया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संकल्प लिया कर प्रदेश को मुक्त कर दिया जाएगा। रेत माफिया, भू-माफिया, शराब माफिया, ड्रग माफिया, माफिया चिटफंड कंपनियाँ आदि के विरुद्ध प्रदेश में कड़ी कार्रवाई की गई। हजारों एकड़ भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई, वहीं चिटफंड कंपनियों की संपत्तियाँ राजसात कर जनता को उनका पैसा वापस दिलवाया गया। ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुमशुदा बेटियों को ढूंढ-ढूंढ कर उनके घर पहुँचाया गया। बेटियों के सम्मान एवं सुरक्षा के लिए पुख्ता कार्य किए गए। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक जैसे नए कानून बनाकर बेटियों का सम्मान सुरक्षित किया गया।
अधोसंरचना विकास के लिए केंद्र के तत्संबंधी फंड का अधिक से अधिक उपयोग किया गया। चंबल एक्सप्रेस-वे को अटल प्रोग्रेस-वे बनाया गया। नर्मदा एक्सप्रेस-वे की भी योजना है। इन दोनों एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के चौथे घटक अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार के अंतर्गत प्रदेश में अधिक से अधिक निवेश लाकर अधिक से अधिक रोजगार सृजन का प्रयास किया जा रहा है। उद्योगों के लिए ‘ स्टार्ट योर बिजनिस इन थर्टी डे’ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुनिश्चित किया गया है और उन्हें विभिन्न प्रकार की सहूलियतें प्रदान की गई हैं। श्रम कानूनों में आवश्यक संशोधन कर उन्हें श्रमिकों कल्याण के साथ ही उद्योगों के विकास के अनुरूप बनाया गया है। कुटीर के साथ छोटे एवं मझोले उद्योगों को भी पूरा प्रोत्साहन दिया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को उत्साहित करने के लिए ‘लोकल फॉर वोकल’ योजना पर कार्य किया जा रहा है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत हर क्षेत्र के उत्पादों को देश विदेश में पहचान एवं बाजार दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के लिए जन-कल्याण सर्वोपरि है। जनता की सेवा ही उनकी पूजा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को चरितार्थ किया है। मध्यप्रदेश में सबके लिए रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई, लिखाई, दवाई और रोजगार के साथ ही जनता को मन, बुद्धि और आत्मा का आनंद भी मिल रहा है। इसके लिए पूरा शासन तंत्र दिन रात कार्य कर रहा है।
रोटी के लिए एक दिन की मजदूरी में एक महीने का राशन दिलाया जा रहा है। शिवराज सरकार ने 37 लाख ऐसे गरीब परिवार जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था, उन्हें यह उपलब्ध कराया। दीनदयाल रसोई योजना के अंतर्गत पका हुआ भोजन भी अत्यंत रियायती दर पर दिया जा रहा है। इस संबंध में दूसरा महत्वपूर्ण कार्य जो शिवराज सरकार कर रही है वह है आगामी 3 वर्षों में हर व्यक्ति को पक्का मकान दिलवाना। इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य प्रारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति कच्चे मकान में नहीं रहेगा। इसके साथ ही लोगों को अपनी जमीन, मकान पर भू-स्वामित्व हक भी दिलवाया जा रहा है। जनजाति भाइयों को वन अधिकार पट्टे दिलवाए जा रहे हैं। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाई-लिखाई के लिए पठन सामग्री के साथ ही नि:शुल्क गणवेश, साइकिलें आदि सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदाय किए जाते हैं। उच्च शिक्षा के लिए निजी महाविद्यालय तथा विदेशों में अध्ययन तक के लिए सरकार मदद का रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदेश में हर व्यक्ति को अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले। इसका सबसे अच्छा उदाहरण कोरोना काल में इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण एवं श्रेष्ठ उपचार था। कोरोना की नि:शुल्क जाँच एवं उपचार की प्रदेश में उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। गरीबों को चिन्हित निजी अस्पताल में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रदेश में दो करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
प्रदेश में खाली पड़े शासकीय पदों पर भर्ती के साथ ही निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हर जिले, हर ब्लाक में प्रतिमाह रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ श्रम सिद्धि अभियान में मनरेगा आदि योजनाओं के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाया गया, वहीं रोजगार सेतु पोर्टल के माध्यम से सभी को उनकी योग्यता के अनुरूप नियोजन मिल रहा है।
जनता को सभी मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने के साथ ही मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को जनता के मन बुद्धि और आत्मा के आनंद की भी चिंता है। मन के सुख के लिए लोक कलाओं, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा खेलकूद आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है। हर पंचायत में एक खेल का मैदान बनाए जाने की योजना है। बुद्धि के विकास के लिए प्रदेश की प्रतिभाओं के प्रकटीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, बच्चों के बौद्धिक विकास पर जोर दिया जा रहा है। वहीं आत्मा के सुख के लिए प्रदेश में अध्यात्म विभाग द्वारा कार्य किए जा रहे हैं। श्री चौहान का मानना है कि कोरोना काल में मध्यप्रदेश की सरकार एवं जनता ने अपने प्रवासी मजदूरों की चिंता करने के साथ-साथ दूसरे राज्यों के प्रवासी मजदूरों की सेवा का जो कार्य किया है वही सबसे बड़ा आत्मिक सुख है।

 

मध्यप्रदेश बना गेहूँ प्रदेश
मुख्यमंत्री बनाम चुनौतियों पर विजय का साल
रीवा 21 मार्च 2021. चुनौतियाँ सफल मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण भाग है परंतु महत्वपूर्ण यह है कि उन चुनौतियों का सामना आप किस प्रकार करते हैं। शायद कुछ ऐसा ही समय प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सामने आया जब 23 मार्च 2020 को उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। खाली खजाने के साथ कोरोना की चुनौती और प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की जीवन रक्षा का प्रश्न सामने खड़ा था।
न मंत्री और न मंत्री-मंडल, खुद ही मंत्री खुद ही मुख्यमंत्री। वक्त मुश्किल था पर हौंसला बुलंद था। एक सदस्यीय मंत्री-मंडल ने शपथ के दिन ही मंत्रालय में कोरोना की समीक्षा से अपने नेतृत्व कौशल का परिचय दिया। चारों ओर चुनौतियाँ, बस जीत का था विश्वास, तो पीछे था प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का हाथ।
कोरोना से लड़ाई लड़नी भी थी तो घर में बैठकर क्योंकि कोरोना से बचाव ही कोरोना पर जीत का मुख्य अस्त्र थी। प्रधानमंत्री के आव्हान पर देश- प्रदेश की जनता अपना कामकाज चंद घंटों में ही जहाँ जिस हाल में था, बंद कर अपने घरों में कैद हो गई। कहते हैं खाली पेट कोई भी जंग नहीं लड़ी जा सकती। मुख्यमंत्री श्री चौहान के सामने बड़ी चुनौती थी घर में बैठकर कोरोना संक्रमण से लड़ रही अपनी जनता रूपी सेना को राशन कैसे पहुँचाए। उधर गेहूँ खेतों में तैयार खड़ा था। पहले गेहूँ की उचित मूल्य पर खरीदी फिर भंडारण एवं उसका वितरण वो भी जनता को घर-घर जाकर।
1.29 करोड़ मी.ट.गेहूँ का उपार्जन
कोरोना लॉकडाउन के सन्नाटे के बावजूद मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में समर्थन मूल्य पर एक करोड़ 29 लाख 28 हजार 379 मीट्रिक टन गेहूँ का बम्पर उपार्जन किया गया। यह देश के किसी भी राज्य द्वारा किये गए उपार्जन में सबसे अधिक है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 25 हजार करोड़ रूपये का भुगतान किया गया, जो विगत वर्ष 2018-19 में किए गए भुगतान से लगभग 11 हजार करोड़ रूपये अधिक था। इस वर्ष भी 2021-22 के लिए किसानों ने अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन करा लिया है। उपार्जन का काम इंदौर और उज्जैन में 22 मार्च से और शेष स्थानों पर एक अप्रैल से प्रारंभ होगा।
तुरंत ऑन लाइन भुगतान
प्रदेश के 4हजार 527 खरीदी केन्द्रों पर 15 लाख 55 हजार 453 किसानों से उनकी समर्थन मूल्य पर क्रय की गई उपज के भुगतान स्वरूप राशि ऑन लाइन उनके खातों में अंतरित की गई। इस वर्ष 2021-21 के लिए प्रदेश में 19 लाख 46 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन कराया था। इसमें से 15 लाख 29 हजार किसानों ने 122 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का विक्रय किया। किसानों को सफल भुगतान के रूप में 16 हजार 183 करोड़ 77 लाख 21 हजार 757 रूपये की राशि ऑनलाइन भुगतान उनके खातों में पहुँचायी जा चुकी है।
निश्चित अवधि में लक्षित उपार्जन
कुल उपार्जित गेहूँ का 87.33 प्रतिशत यानी एक करोड़ 7 लाख 27 हजार 926 मीट्रिक टन गेहूँ का परिवहन किया जाकर उसे सुरक्षित गोदामों में भंडारित कराया गया। लॉक डाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विपरीत परिस्थितियों में गेहूँ का निश्चित अवधि में उपार्जन मानसून को देखते हुए जरूरत के साथ एक उपलब्धि भी है।
छोटे एवं मध्यम किसान हुए लाभान्वित
इस एक वर्ष में प्रदेश के कुल पंजीकृत किसानों में से 13 लाख 80 हजार लघु, मध्यम एवं सीमांत किसानों ने अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर विक्रय किया। इनमें लगभग 3 लाख 81 हजार सीमांत किसान शामिल हैं जबकि 5 लाख 41 हजार छोटे किसानों सहित 4 लाख 68 हजार मध्यम किसानों ने उपार्जन का लाभ लिया।लघु,मध्यम एवं सीमांत किसानों ने 86.57 मीट्रिक टन गेहूँ का विक्रय किया। इनमें से सीमांत किसानों ने अभी तक कुल 9 लाख 26 हजार मीट्रिक टन, छोटे किसानों ने 28 लाख 38 हजार मीट्रिक टन और मध्यम किसानों ने 48 लाख 93 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का समर्थन मूल्य पर विक्रय किया है। शेष गेहूँ बड़े किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया।
प्रदेश को गेहूँ प्रदेश बनाने का श्रेय किसी को जाता है तो वो है प्रदेश का किसान, प्रदेश का अन्न-दाता। सरकार किसानों की आय को दोगुनी करने और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में अच्छे उत्पादन के चलते इस साल 16 लाख किसानों से बम्पर गेहूँ उपार्जन करके एक नया इतिहास बनाया गया है। इस तरह मध्यप्रदेश गेहूँ उपार्जन में देश का नंबर वन राज्य बना।
इस सफलता को पुन: दोहराते हुए प्रदेश में धान के उपार्जन का कार्य भी सफलता पूर्वक संपादित किया गया। इसीका परिणाम है कि जनवरी 21 तक 5 लाख 86 हजार से अधिक किसानों से 37 लाख 27 हजार मीट्रिक टन से अधिक मात्रा में धान उपार्जित किया गया। इसके अलावा 42 हजार 400 से अधिक किसानों से 2 लाख 24 हजार मीट्रिक टन से अधिक ज्वार एवं बाजरा भी समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। गेहूँ,धान एवं अन्य फसलों के उपार्जन के विरूद्ध 33 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि किसानों के खातों में अंतरित की गई।
राशन का सुनियोजित वितरण
उपार्जन के बाद सरकार के सामने अपनी जनता को राशन वितरण की चुनौती थी। चुनौती इसलिए कि कोरोनो के कारण लगे लॉक डाउन एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन वितरण के साथ करना था। सरकार ने एक करोड़ 10लाख पात्र परिवार के 4 करोड़ 72 लाख सदस्यों को खाद्यान्न सुरक्षा के तहत राशन वितरण कर इसे बखूबी पूरा किया। अन्त्योदय अन्न योजना में पात्र परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार और प्राथमिकता वाले परिवारों को 5 किलोग्राम प्रति सदस्य प्रतिमाह के मान से खाद्यान्न का वितरण एक रूपये प्रति किलोग्राम की दर से किया गया।
‘वन नेशन – वन राशन कार्ड’ योजना
प्रदेश के बाहर रहने वाले प्रदेश के नागरिकों कोखाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए वन ‘नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से हितग्राही अब प्रदेश के बाहर जिस राज्य में वे रह रहे हैं वहाँ से खाद्यान्न लेने के लिए स्वतंत्र है। इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी के माध्यम से माह जनवरी तक 3 लाख 85 हजार से अधिक परिवारों को खाद्यान्न प्रदान किया गया।इसके अलावा प्रदेश में रहने वाला व्यक्ति भी अपने क्षेत्र में किसी भी दुकान से राशन प्राप्त कर सकता है।
अन्न उत्सव
राज्य शासन द्वारा यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि गरीब की थाली किसी भी हालत में खाली न रहे। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों के नवीन चिन्हित व्यक्तियों को पात्रता पर्ची जारी की गई, जो अभी तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन प्राप्त करने से वंचित थे।’अन्न उत्सव’ कार्यक्रम के माध्यम से 25 श्रेणियों के नवीन पात्रता पर्चीधारी 6 लाख 46 हजार से अधिक परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली केमाध्यम से राशन वितरण का कार्य प्रारंभ किया गया। अब तक ऐसे लगभग 9 लाख परिवारों के लगभग 31 लाख सदस्यों को नियमित राशन वितरण किया गया है।
चना, मसूर, सरसों का उपार्जन
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के एक वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश में लगभग 3 लाख किसानों से 8 लाख से अधिक मीट्रिक टन चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन कर 3 हजार 900 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान किसानों को किया गया।इसी के साथ खरीफ में 5 लाख 89 हजार किसानों से 37 लाख 26 हजार मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया। किसानों को उपार्जित धान की कुल राशि 6 हजार 961 करोड़ रूपये भुगतान की गई। इसी प्रकार एक लाख 95 हजार मीट्रिक टन बाजरा एवं 29 हजार मीट्रिक टन ज्वार का उपार्जन किया गया है।

इस बार शिवराज सरकार का लक्ष्य – आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश
रीवा 21 मार्च 2021. एक सच्चे नेतृत्व की पहचान संकट के समय में ही होती है। कोरोना संक्रमण के विश्वव्यापी दौर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 130 करोड़ भारतीयों को यह संदेश दिया कि यदि देश के आत्म-गौरव की रक्षा करनी है तो एक ही उपाय है – आत्म-निर्भर भारत का निर्माण। आत्म-निर्भरता कोई साधारण शब्द नहीं है – यह पहली बार अपनी ताकत को पहचानने की दिशा में लगाई गई ऊँची छलांग है।
प्रधानमंत्री के इस संदेश के अनुरूप काम करने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘चरवैति-चरवैति’ को अपना ध्येय वाक्य बनाकर आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप को आकार देना प्रारंभ किया। नीति आयोग, भारत सरकार के सहयोग से पिछले वर्ष अगस्त माह में राष्ट्रीय स्तर के वेबिनार्स किए गए। इन वेबिनार्स में 4 समूहों और 18 उप समूहों में 635 विद्वानों और विषय-विशेषज्ञों द्वारा आत्म-निर्भरता के प्रत्येक पहलू पर गहन चिंतन-मंथन कर 259 अनुशंसाएँ प्रस्तुत की गयीं।
इस विचार-विमर्श से जो अमृत निकला, उन्हीं अनुशंसाओं को समाहित करते हुए आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप तैयार किया गया। इस तरह मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बना, जिसने आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का रोडमैप तैयार कर उसे 12 नवंबर, 2020 से प्रभावशील भी कर दिया। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का ताना-बाना सुशासन, भौतिक अधोसंरचना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य तथा अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार के चार स्तंभों इर्द-गिर्द बुना गया है। रोडमैप तैयार तैयार होने के समय उसमें इन चारों क्षेत्रों में आउटपुट एवं आउटकम का चिन्हांकन किया गया था। आज की स्थिति में प्रत्येक आउटपुट के लिए गतिविधियों एवं उप गतिविधियों का निर्धारण भी कर लिया गया है।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप के नियमित अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए आत्म-निर्भर पोर्टल का भी निर्माण किया गया है। इस प्रकार मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के न भूतो न भविष्यति नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार का समय, संसाधन, सेवाएँ सभी अर्जुन के लिए आँख की भाँति एक ही उद्देश्य, एक ही लक्ष्य की ओर केंद्रित है और वह है आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने वर्ष 21-20 के अपने बजट भाषण में जिन 6 स्तंभों का उल्लेख किया है, आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप के चारों स्तंभ भी उनके ही अनुरूप है।
भारत सरकार के बजट स्तम्भ राज्य सरकार के आत्म-निर्भरता स्तम्भ
भौतिक, वित्तीय एवं पूंजीगत अधोसंरचना का निर्माण भौतिक अधोसंरचना
स्वास्थ्य और कल्याण शिक्षा एवं स्वास्थ्य
आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास-अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार
नवप्रवर्तन, अनुसंधान और विकास-सुशासन
मानव पूँजी में नवजीवन का संचार-शिक्षा एवं स्वास्थ्य, अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार
मिनिमम गवर्नमेंट – मैक्सिमम गवर्नेंस सुशासन
इसी प्रकार आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के स्तंभ, नीति आयोग की शासी निकाय की बैठक में भारत के ट्रान्सफार्मेशन के लिये रखे गये छह सूत्रीय एजेण्डा के भी अनुरूप है।

नीति आयोग का ट्रान्सफार्मेशन एजेण्डा राज्य सरकार के आत्म-निर्भरता स्तम्भ
मेकिंग इण्डिया ए ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब-अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार
रिइमेजनिंग एग्रीकल्चर अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार
इम्प्रूविंग फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर भौतिक अधोसंरचना
एक्सेलेरेटिंग हयूमन रिसोर्स डेव्हलपमेंट शिक्षा एवं स्वास्थ्य, अर्थ-व्यवस्था एवं रोजगार
इम्प्रूविंग सर्विस डिलेवरी एट ग्रास रूट लेवल-सुशासन
हैल्थ एण्ड न्यूट्रिशन-शिक्षा एवं स्वास्थ्य
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप के क्रियान्वयन और विभिन्न योजनाओं तथा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की सतत समीक्षा के लिये एक मजबूत मॉनीटरिंग सिस्टम बनाया गया है। इस सिस्टम के अंतर्गत रोडमैप के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग के लिये आत्म-निर्भर पोर्टल, जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं की प्रगति की मानीटरिंग के लिए सीएम डैशबोर्ड और राज्य स्तर पर वृहद परियोजनाओं की मासिक समीक्षा के लिए प्रगति एप बनाया गया है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति एवं संभावनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से जीआईएस आधारित पोर्टल ‘एमएलए डैशबोर्ड बनाया गया है। विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिमाह स्वयं मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा कलेक्टर्स, कमिशर्स, आई.जी., एस.पी. आदि के साथ मैराथन समीक्षा की जाती है। इसके अलावा इस सिस्टम में जनता से टोल फ्री नम्बर पर प्राप्त होने वाली शिकायतों एवं समस्याओं का समाधान के लिये सीएम हेल्पलाईन, जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र के रूप में जन-सुनवाई, चिन्हित सेवाएँ 24 घण्टे में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाधान एक दिन, मोबाईल पर चिन्हित सवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सी.एम. जनसेवा और चिन्हित शिकायतों का मुख्यमंत्री की निगरानी में निराकरण के समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम भी शामिल है।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश रोडमैप में चारों प्रमुख बिंदु – भौतिक अधोसंरचना, सुशासन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा तथा अर्थ-व्यवस्था एवं रोज़गार जैसे क्षेत्रों में वर्ष 2023तक किए जाने वाले कार्यों की सूची तय की गई है। इसमें कौन-सा काम कब तक पूरा होगा, इसकी समयावधि भी साथ में निश्चित की गई है। अलग-अलग क्षेत्रों में तय किए गए संकल्प इस प्रकार है:
भौतिक अधोसंरचना
सड़क: फ्लैगशिप योजनाओं का फास्ट ट्रैक विकास।सड़क विकास के लिये बेहतर विकास योजना एवं राजस्व वृद्धि के लिए 200 सड़कों का साइंटिफिक ट्रैफिक सर्वे । अगले 6 माह में प्रदेश के सभी टोल प्लाजा का कम्प्यूटीकरण एवं फास्ट टैग के जरिये ऑटोमेशन।अनुबंधों को समय-सीमा में पूरा करने और परियोजना लागत में वृद्धि को नियंत्रित करने संबंधी विवादों के निपटारे के लिए उच्च-स्तरीय बॉडी का गठन।सड़कों की प्राथमिकता तय करने और तकनीकी आधारित स्थिति के आकलन के लिये रोड ऐसेट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना।
यात्रा एवं पर्यटन
‘बफर में सफर’ मुहिम के माध्यम से मानसून पर्यटन को बढ़ावा देना। 2-टाइगर सफारी विकसित करना (कान्हा/पेंच/बाँधवगढ़ में)अमरकंटक, रामायण सर्किट, तीर्थंकर सर्किट, ओंकार सर्किट, नर्मदा परिक्रमा, रूरल सर्किट एवं ट्राइबल सर्किट जैसे थीम सर्किट को विकसित करना।निजी क्षेत्रों/निवेशकों को शामिल करके पर्यटन-स्थलों का वैल्यू एडिशन करना। अनुभव पर्यटन (जैसे रोप-वे. संग्रहालय, डायमंड टूर, साड़ी बनाना, एडवेंचर स्पोर्ट्स, एस्ट्रोनॉमी पार्क आदि के माध्यम से) कराते हुए पर्यटकों को आकर्षित करना।ग्रामीण पर्यटन, ट्राइबल पर्यटन, होम-स्टे आदि को बढ़ावा।पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले 20हजार सेवाप्रदाताओं का कौशल संवर्धन।
नगरीय विकास एवं आवास
समावेशी शहरी विकास: पर्यावरण सहयोगी संवहनीय विकास सुनिश्चित करना।नगरीय सुशासन के लिए कानूनी और राजकोषीय सुधार।शहरी सेवा प्रदाय की गुणवत्ता में सुधार।नगरीय नियोजन के माध्यम से शहरी अर्थव्यवस्था मेंसुधार।
जल
पेयजल: मार्च 2021तक ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप वॉटर सप्लाई की उपलब्धता को राष्ट्रीय औसत से भी अधिक बढ़ाना। (वर्तमान औसत 17प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत 26प्रतिशत)26 लाख घरों को वर्तमान वर्ष में कनेक्शन देना।वर्ष 2024तक मध्यप्रदेश के 100प्रतिशत ग्रामीण घरों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।नल, बिजली आदि की मरम्मत के लिए 50हजार मैकेनिकों को तीन वर्षों में प्रशिक्षित करना।
सिंचाई: नर्मदा परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आगामी तीन वर्षों में लगभग 15हजार करोड़ रुपये ऑफ बजट ऋण से एनबीपीसीएल द्वारा अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराना।चालू वर्ष में 4000करोड़ रुपये के ऋण की व्यवस्था।सिंचाई एवं नर्मदा विकास विभाग द्वारा आगामी एक वर्ष में 30हजार करोड़ रुपये के कार्यों का आवंटन करना।
ऊर्जा
नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बाँध पर टीबीसीबी रूट के माध्यम से 600मेगावॉट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का विकास 3000करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट होगा। मुरैना, छतरपुर, आगर, नीमच, शाजापुर जिलों में 18 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश किया जाएगा। 4 हजार 500 मेगावॉट के सोलर पार्कों का विकास टीबीसीबी रूट के माध्यम से 35ई.एच.वी. सब-स्टेशन और संबंधित ट्रांसमिशन सिस्टम का अनुमानित 2000 करोड़ रूपये के निजी निवेश से निर्माण।आगामी एक वर्ष में 4000करोड़ रुपये लागत की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना को पूर्ण करना। 45 हजार सोलर पंप लगाए जाएंगे।
परिवहन एवं लॉजिस्टिक: मध्यप्रदेश को देश के भंडारण एवं लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने के लिये मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना।एंड-टू-एंड इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक संचालन के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म।वर्तमान परिसंपत्तियों का उद्योग अनुकूल मुद्रीकरण, आधुनिकीकरण और उन्नयन।नाशवान सामग्री के लिए एयर कार्गो हब की नीति कानिर्धारण एवं उसकी स्थापना। उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप परिवहन कर निर्धारण। मध्यप्रदेश लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का गठन।
सुशासन
नागरिकों की सुविधाओं के लिए एकल डेटाबेस। सेवा प्रदाय के लिए एकल पोर्टल। सार्वजनिक सेवा के लिये एम-गवर्नेस का उपयोग। सीएम हेल्पलाइन से क्ग् क्त्द्यत्न्न्ड्ढद क्ठ्ठद्धड्ढ ऋग्घ्। सेवा प्रदाय के लिए आवश्यक दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन। सेवाओं के भुगतान के लिए विभिन्न भुगतान प्रणालियों का विकल्प। राज्य में कनेक्टिविटी के बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण और आईटी कौशल का विकास शासकीय कर्मियों को आईटी के उपयोग के लिए दक्ष बनाना। शासकीय अधिकारियों को नवीनतम तकनीकी/तथ्यों के साथ अपडेट रखना। वल्लभ भवन (मंत्रालय) में ई-ऑफिस/केंद्रीकृत डाक व्यवस्था का क्रियान्वयन। समस्त विभागों और जिला कलेक्टरों के प्रभावी उपयोग के लिए डैशबोर्ड विकसित किया जाना। शिक्षा /टेली-मेडिसिन सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराना। शासन में नवीन प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करना। हितग्राहियों की सूची का शासन में बेहतर पारदर्शिता के उद्देश्य से डिजिटलीकरण और नॉलेज मैनेजमेंट। जवाबदेह एवं जिम्मेदार प्रशासन के.पी.आई. (ख़्ड्ढन्र् घ्ड्ढद्धढदृद्धथ्र्ठ्ठदड़ड्ढ क्ष्दड्डत्ड़ठ्ठद्यदृद्ध), ऑनलाइन मॉनीटरिंग, थर्ड पार्टी मूल्यांकन। एनजीओ, सोशल ऑडिट के जरिए जन-भागीदारी को बढ़ावा। आम नागरिकों की समझ एवं उपयोग के लिए नियमों एवं कानूनों का सरलीकरण। नागरिकों के लिए ईज ऑफ लिविंग (अपनी पात्रता जानें त्त्ददृध्र् न्र्दृद्वद्ध ड्ढदद्यत्द्यथ्ड्ढथ्र्ड्ढदद्य, लैंड टाइटल, लायसेंस/परमिट, फेसलेस संपर्क)व्यापक कैडर समीक्षा। सभी कर्मियों की में मैपिंग। आवश्यक और सक्षमता का आकलन। पदोन्नति के लिए कौशल क्षमता को प्राथमिकता। आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना। सेवानिवृत्ति पर देय स्वत्वों का एकमुश्त भुगतान।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा
रोडमैप के इस स्तंभ के अंतर्गत यूनिवर्सल स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) प्राप्त किया जायेगा। दिसंबर 2024तक मातृ मृत्यु दर की प्रति एक लाख जीवित जन्म दर को 173से 100तक लाना, प्रति एक हजार जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर को 48से 35तक लाने और एनएमआर 35को से 25तथा टीएफआर को 2.1करने पर काम किये जायेंगे। स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों के सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन, सरकारी विभागों का पुनर्गठन और बेहतर सेवा वितरण के लिए एक समन्वय तंत्र के निर्माण किया जाएगा। एकीकृत आईसीटी प्लेटफार्मों के एकीकृत परिनियोजन से स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रमों में बेहतर परिणाम लाये जायेंगे। पैरा मेडिकल स्टाफ सहित स्वास्थ्य और शिक्षा पेशेवरों की गुणवत्ता में सुधार, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिये एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के साथ ही बीमारियों की रोकथाम और निदान पर जोर दिया जायेगा। स्कूल, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभागों के संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में प्रत्यायन, सभी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उच्च शिक्षा के छात्रों की रोज़गार क्षमता में सुधार के काम किये जायेंगे। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों की वृद्धि में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना, सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के उपयोग में सुधार के लिए उनका पुनर्गठन, लिंग समता पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें आकांक्षात्मक बनाने के साथ उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा की पहुँच में सुधार का भी लक्ष्य है। तकनीकी और उच्च शिक्षा में बेहतर उद्योग और अकादमिक इंटरफेस, स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों में पाठ्यक्रम का पुनरीक्षण और उत्कृष्टता केंद्रों का निर्माण भी इस स्तंभ में शामिल है।
अर्थ-व्यवस्था एवं रोज़गार
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र: फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा विविधीकरण।कृषि में जोखिम प्रबंधन के लिए नवीन/उन्नत कृषि तकनीकी के कृषि क्षेत्र में शीघ्र उपयोग को प्रोत्साहित करना औरकृषि अधोसंरचना का विकास ताकि घरेलू और विदेशी उपभोक्ताओं के लिए उत्पादन और कुशल वितरण तंत्र को सहयोग मिले।प्रमाणित जैविक कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी।’एक राष्ट्र एक बाजार’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि विपणन कानूनों में सुधार।कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादकों का मूल्य संवर्धन।पशुपालन विकास। ग्रामों में डेयरी व्यवसाय का विकास।अतिरिक्त रोज़गार के लिए मत्स्य-पालन तथा रेशम पालन विकास।
उद्योग एवं कौशल विकास: प्रदेश में विश्व-स्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना का विकास तथा मध्यप्रदेश को सबसे पसंदीदा व्यापार स्थल के रूप में स्थापित करना।व्यापार के लिए सहूलियत को बढ़ावा देना।मध्यप्रदेश को स्टार्ट- अप डेवलपमेंट हब के रूप में स्थापित करना।राज्य में कार्य-बल की कौशल क्षमता को बढ़ाना।
प्राकृतिक संसाधन: वन आधारित आर्थिक गतिविधियों के योगदान में वृद्धि।वन संपदा का संवहनीय उपयोग।खनिज संपदाओं का वैज्ञानिक दोहन कर रोज़गार प्रदान करना।
व्यापार एवं वाणिज्य: व्यापार एवं वाणिज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा।छोटे व्यवसायों तथा परंपरागत उद्योगों के उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से जोड़ना।व्यापार सहायक सेवाओं का सुदृढ़ीकरण।
कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प सिर्फ आत्म-निर्भरता का दस्तावेज तैयार करना ही नहीं है, बल्कि उसने इसके चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए समय-सीमा भी तय कर दी है। पूरा देश मध्यप्रदेश की संकल्पबद्धता से वाकिफ है। देश ने देखा है कि एक समय पिछड़े और बीमारू कहे जाने वाले इस राज्य ने खुद को जाग्रत और सक्रिय करते हुए कैसे कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल कर लगातार कृषि कर्मण सम्मान पाया और कैसे प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को एक संकल्प के रूप में लेते हुए प्रदेश के शहरों को स्वच्छ करने का बीड़ा उठाया। इंदौर का देश के स्वच्छतम शहरों की सूची में लगातार अव्वल आना और भोपाल सहित प्रदेश के अन्य कई शहरों का स्वच्छता के पैमाने की सूची में प्रमुख स्थान हासिल करना इसका उदाहरण है। यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश यदि ठान ले तो उसके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं है। इस बार मध्यप्रदेश ने खुद को आत्म-निर्भर बनाने का संकल्प लिया है और विश्वास किया जा सकता है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के गतिशील, कर्मठ और संकल्पसिद्ध नेतृत्व तथा अपनी मेहनत एवं इच्छा-शक्ति के बल पर प्रदेश इस संकल्प को भी सफलतापूर्वक पूरा करेगा।

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