विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के रीवा सेवा केंद्र द्वारा एक सार्थक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन

विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के रीवा सेवा केंद्र द्वारा एक सार्थक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को याद करने का माध्यम बना, बल्कि उसे वर्तमान जीवन से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी रहा। कार्यक्रम का संचालन बीके सुभाष भाई जी ने सहज और प्रभावशाली शैली में किया, वहीं बीके लता दीदी की अध्यक्षता में पूरा आयोजन गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें आर.बी. पटेल जी, बीके सीखा चिटके जी, बीके प्रभाकर सिंह जी, बीके सुशील चतुर्वेदी जी, कैलाश तिवारी जी, शेखर कुमार जी तथा अन्य सम्मानित अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने धरोहरों के महत्व को केवल अतीत तक सीमित न रखते हुए, उसे वर्तमान और भविष्य की आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत किया। विशेष रूप से पटेल जी ने धरोहरों की वैचारिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज के समय में यह हमारी पहचान और संतुलित समाज के निर्माण का आधार हैं।
कार्यक्रम में बीके सत्येंद्र भाई जी ने विस्तार से समझाया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान किस प्रकार पिछले कई दशकों से पर्यटन, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक जागरूकता को जोड़कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि धरोहरें केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक विकास, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सशक्त निर्माण का आधार हैं। उनकी प्रस्तुति में यह स्पष्ट झलकता रहा कि यदि हम अपनी विरासत को समझते और संरक्षित करते हैं, तो वह हमारे व्यक्तित्व और समाज दोनों को समृद्ध बनाती है।
अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने दृष्टिकोण से इस विषय को गहराई दी। प्रभाकर सिंह जी ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए धरोहरों के समय-समय पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित किया, वहीं कैलाश तिवारी जी ने युवाओं तक इस विषय को पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुशील चतुर्वेदी जी ने स्थानीय स्तर पर किए जा सकने वाले प्रयासों की चर्चा की और प्राचार्य दीपक तिवारी जी ने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की समग्र विवेचना प्रस्तुत की। विजय देव भाई जी ने सभी को नशा मुक्ति और सकारात्मक जीवन का संकल्प दिलाया, जिससे कार्यक्रम में एक सामाजिक संदेश भी सशक्त रूप से उभरा।
बीके प्रमोद जी ने धरोहरों को आध्यात्मिकता से जोड़ते हुए बताया कि जब हम अपने मूल्यों और संस्कारों को समझते हैं, तभी वास्तविक संरक्षण संभव होता है। बीके लता दीदी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आध्यात्मिकता ही वह शक्ति है जो हमारी सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत बनाए रखती है। वहीं सुभाष भाई जी ने रीवा, गोविंदगढ़ और मऊगंज जैसे क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए स्थानीय विरासत के महत्व को सामने रखा।
विश्व धरोहर दिवस 2026 की भावना भी इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसमें समुदाय की भागीदारी, सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा और सतत विकास के साथ धरोहरों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी ने अपने-अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने और धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने का निर्णय लिया।
यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम न रहकर, एक जागरूकता की “ज्योति” बनकर उभरा, जो समाज में निरंतर प्रेरणा देती रहेगी। ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा इस प्रकार के प्रयास यह सिद्ध करते हैं कि जब आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी साथ चलते हैं, तब ही सच्चे अर्थों में हमारी धरोहरों का संरक्षण संभव हो पाता है।
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