नरवाई प्रबंधन के संबंध में किसानों को किया गया जागरूक

नरवाई प्रबंधन के संबंध में किसानों को किया गया जागरूक

रीवा 27 अक्टूबर 2025. पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण तथा मिट्टी की उर्वरता के संरक्षण के उद्देश्य से नरवाई जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगाया गया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर किसानों को खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में आग न लगाने की सलाह दी गई। उप संचालक कृषि कल्याण यूपी बागरी ने जानकारी दी की सिरमौर विकासखण्ड के ग्राम तेंदुन और नेबूहा, रायपुर कर्चुलियान के सगरा, रीवा विकासखण्ड के लक्ष्मणपुर में, त्योंथर विकासखण्ड के अखवार, जवा के ग्राम कोनी तथा गंगेव विकासखण्ड के ग्राम तिवनी में नरवाई प्रबंधन कार्यक्रम अन्तर्गत किसानों को जागरूक किया गया। किसानों को बताया गया कि हार्वेस्टर के माध्यम से फसल की कटाई करने पर उसमें स्ट्रारीपर लगाना अनिवार्य है। जिन हार्वेस्टरों में अवशेष प्रबंधन सिस्टम नहीं होगा उन्हें फसल कटाने की अनुमति नहीं दी जायेगी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खेतों में नरवाई जलाने से मिट्टी के कई लाभदायक सूक्ष्म जीव एवं जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी कठोर हो जाती है। साथ ही इसकी जलधरण क्षमता भी घटती है।

किसान भाईयों को सलाह दी गई कि नरवाई जलाने के स्थान पर फसल के अवशेष को एकत्रित कर पशुओं को भोजन के रूप में उपयोग करें। फसल अवशेष का उपयोग कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस बनाने में भी किया जाता है। जिससे किसानों को अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी। किसान यदि धान के बाद अन्य कोई फसल लेना चाहता है तो हैप्पी सीडर और सुपर सीडर से फसल की बोनी करे। इससे नरवाई मिट्टी में मिलकर खाद के रूप में फसल के लिए पोषण का कार्य करेगी। नरवाई को बेलर, रैकर एवं चापर मशीन की सहायता से बंडल बनाकर औद्योगिक ईधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। कार्यक्रमों में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह भी दी गई। साथ ही कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं से भी परचित कराया गया। इस दौरान ग्राम पंचायतों के किसान भाई तथा कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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