एक दिवसीय समारोह में नृत्य नाटिका और भक्ति गायन की प्रस्तुति

एक दिवसीय समारोह में नृत्य नाटिका और भक्ति गायन की प्रस्तुति

रीवा 16 अगस्त 2025. संस्कृति विभाग द्वारा कृष्‍णा राजकपूर ऑडिटोरियम में ‘श्रीकृष्‍ण पर्व’- “हलधर महोत्‍सव एवं लीला पुरुषोत्‍तम का प्रकटोत्‍सव” का आयोजन किया गया। कल-कल बहती बीहर नदी श्रीकृष्ण की पावन लीला प्रस्तुतियाँ का साक्षी बनीं। सागर के दूर्वा नामदेव ने बधाई, रीवा की मणिमाला सिंह और मुंबई के रवि त्रिपाठी और ग्रुप ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। रीवा की मणिमाला सिंह अपने भक्ति गायन से भारतीय परंपरा और लोक कथाओं को अपनी मधुर आवाज से जीवंत कर दिया। उन्होंने गणेश वंदना आज की रात रुक जाना गंजानंद हमरी नगरिया में से प्रस्तुति का आरंभ किया। इसके बाद सोहर गीत भादो रैन भयावन…, बधाई गीत बधावा नंद के घर आज…, बाजी-बाजी रे बधइयां बड़ी दूर…, झूला गीत झूला पड़ा कदम की डाली…, हिंडोली सोवत कान्हा की माया गोहराम… जैसे गीतों की प्रस्तुति दी।

सागर के दूर्वा नामदेव की प्रस्तुति में बुंदेलखण्ड अंचल में जन्म, विवाह और तीज-त्यौहारों पर बधाई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मन्नत पूरी हो जाने पर मंदिरों में बधाई नृत्य किया जाता है। इस नृत्य में स्त्रियां और पुरुष दोनों ही उमंग से भरकर नृत्य करते हैं। बूढ़ी स्त्रियां कुटुम्ब में नाती-पोतों के जन्म पर अपने वंश की वृद्घि के हर्ष से भरकर घर के आंगन में बधाई नाचने लगते हैं। नेग-न्यौछावर बांटती हैं। बधाई नृत्य के नर्तकों के चेहरे में उल्लास, पद संचालन, देह की लचक और रंगारंग वेशभूषा ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस नृत्य में ढपला, टिमकी, रमतूला और बांसुरी जैसे वाद्य यंत्र का उपयोग किया गया। कार्यक्रम में रवि त्रिपाठी और साथी कलाकारों ने मोरे कृष्णा मोरे कृष्णा…, यशोमति मैया से…, वृन्दाबन का कृष्ण कन्हैया…, श्याम तेरी बंशी…, इक राधा इक मीरा…, गोबिंदा आला रे…, बड़ी देर भई नंदलाला…, गोबिंद बोलो हरि गोपाल बोलो…, श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी… और कभी राम बनके कभी श्याम बनके आदि गीतों की प्रस्तुति दी।

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