नई शिक्षा नीति में शोध परक शिक्षा जरूरी – राज्यपाल लालजी टंडन

कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति भाषणमाला संपन्न

रीवा 16 सितम्बर 2019. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में आयोजित कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति भाषणमाला में नई शिक्षा नीति और हमारी भूमिका विषय पर मुख्य अतिथि के तौर पर उद्बोधन में प्रदेश के राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने कहा कि विद्यार्थियों व शिक्षकों के मन में राष्ट्रप्रेम व स्वाभिमान की भावना होनी चाहिए इसके साथ ही नई शिक्षा नीति में शोध परक शिक्षा पर जोर देना आवश्यक है तभी नये भारत का निर्माण होगा।
राज्यपाल ने कहा कि हमारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। नालंदा व तक्षशिला शिक्षण संस्थान प्राचीन भारत के शिक्षा के आधार स्तंभ रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था में गुरूकुल का विशेष महत्व था। ज्ञान का भंडार हमारे वेदों में निहित है। विदेशी आक्रमण के बाद मनीषियों में वैचारिक चिंतन की शुरूआत हुई। उन्होंने कहा कि विद्वता व उद्यमिता के समन्वय से युवा अपना भविष्य संवार सकते हैं इसिलए आवश्यक है कि व्यावहारिक शिक्षा को भी नई शिक्षा नीतियों में समाहित किया जाये। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा प्राप्ति के बाद नये जीवन की शुरूआत होती है। हमारी अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। अपनी मेघा का इस्तेमाल कर बुद्धि व पौरूष से कुछ करने की तमन्ना होनी चाहिए। कौशल विकास व स्टार्टअप जैसे नवाचार युवाओं को स्वयं उद्यम स्थापना में सहायक हो रहे हैं। विद्यार्थियों के सामने विकल्प खुले हैं। वह समग्र में अपने भविष्य को सुखद बनाने का सपना लेकर चिंतन करते हुए आगे बढ़ें और भारत को सर्वश्रेष्ठ देश बनाने में सहभागी बनें।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के शंभूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित भाषणमाला में विशिष्ट अतिथि केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि नई शिक्षा नीति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आदर्श शिक्षकों की नियुक्ति के प्रयास किये जा रहे हैं। अनिवार्य शिक्षा व शिक्षा के विकास में गुणवत्ता से समझौता न हो और समय पर शिक्षकों की कमी की पूर्ति की जाये। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मन में जिज्ञासा को लेकर ऊंचाईयां प्राप्त करें। सांसद रीवा जनार्दन मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा प्रणाली में बहु अनुशासनात्मक प्रणाली होना आवश्यक है। रोजगार का सृजन बहुआयामी शिक्षा से ही संभव है। स्वायत्तता व अनुसंधान जैसे नवाचार शिक्षा नीति में जरूरी है। शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों को संयुक्त प्रयासों से ही नई शिक्षा नीति को ऊंचाईयां मिलेंगी।
इससे पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ चिंतक व समाजसेवी भगवत शरण माथुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में जनता की भूमिका से ही सुधार होगा। शिक्षा देने वाले का आचरण, व्यवहार व अनुशासन से ही शिक्षा में गुणात्मक सुधार आ सकता है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूषरंजन अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा एवं अवधेश प्रताप सिंह तथा पं. शंभूनाथ शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ इस दौरान राज्यपाल सहित अतिथियों को शाल, श्रीफल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधायक गुढ़ नागेन्द्र सिंह, विधायक देवतालाब गिरीश गौतम, कमिश्नर रीवा संभाग डॉ. अशोक कुमार भार्गव, कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक आबिद खान सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं पत्रकार व बड़ी संख्या में सुधी श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन कुल सचिव लाल साहब सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश कुशवाहा द्वारा किया गया। इससे पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में राज्यपाल श्री लालजी टंडन को गार्ड ऑफ आनर दिया गया।

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