सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश सरकार का सराहनीय क़दम

सुगम परिवहन सेवा : सरकारी व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय कदम

सरकार का अस्तित्व केवल सत्ता में बने रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक सार्थकता जनता को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने और जनविश्वास अर्जित करने में निहित है।

सरकार का अर्थ है—स्वयं सक्षम व्यवस्था। किसी भी सरकार की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने में कितनी सक्षम है। आज के दौर में जब निजीकरण को विकास का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है, तब यह समझना भी आवश्यक है कि सरकारी व्यवस्थाओं का सुदृढ़ बने रहना क्यों जरूरी है।

निजी क्षेत्र का विकास अपनी जगह आवश्यक है, लेकिन इसके साथ सरकारी सेवाओं का विस्तार और उनकी गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकारी तंत्र सक्षम और उपलब्ध रहेगा, तो जनता का सरकार से सीधा जुड़ाव बना रहेगा। जब सरकार जनता की जरूरतों को पूरा करती है, तभी जनता उससे अपेक्षा रखती है, उसकी जवाबदेही तय करती है और उसकी भूमिका को महत्व देती है। इसके विपरीत, यदि आवश्यक सेवाओं से सरकारी तंत्र की भूमिका समाप्त होती चली जाए, तो जनता और सरकार के बीच प्रत्यक्ष जुड़ाव भी कमजोर पड़ सकता है।

इसी दृष्टिकोण से मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत एक स्वागतयोग्य कदम है।

21 वर्ष बाद सरकारी परिवहन सेवा की वापसी

मध्य प्रदेश में लगभग 21 वर्ष पहले बंद हो चुकी सरकारी परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में पुनः प्रारंभ करने का प्रयास सार्वजनिक परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्ष 2005 में मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC) की सेवाएँ बंद कर दी गई थीं। उस समय इसके पीछे घाटे को प्रमुख कारण बताया गया था।

हालाँकि, किसी सरकारी सेवा का घाटे में चलना अपने आप में उसे बंद करने का पर्याप्त आधार नहीं होना चाहिए। यह भी देखना आवश्यक है कि घाटे के कारण क्या हैं, प्रबंधन में कहाँ कमियाँ हैं और व्यवस्था को सुधारकर जनता को बेहतर सेवाएँ कैसे दी जा सकती हैं।

सरकार के पास परिवहन संचालन के लिए पहले से ही डिपो, भूमि, बसों और अन्य आधारभूत संसाधनों का तंत्र मौजूद था। ऐसे में उस व्यवस्था को सुधारकर चलाने की संभावनाओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए था। यदि प्रबंधन की कमियों, भ्रष्टाचार अथवा संचालन संबंधी समस्याओं के कारण कोई सेवा घाटे में जा रही थी, तो उनका समाधान करना आवश्यक था।

सरकारी परिवहन सेवा बंद होने के बाद निजी ऑपरेटरों की भूमिका बढ़ना स्वाभाविक था। लेकिन इससे यह प्रश्न भी उत्पन्न होता है कि क्या सार्वजनिक परिवहन की जिम्मेदारी पूरी तरह निजी क्षेत्र के भरोसे छोड़ देना उचित है?

निजी परिवहन सेवाएँ आवश्यक हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन में सरकार की भूमिका भी बनी रहनी चाहिए। सरकार का दायित्व केवल निजी क्षेत्र को सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वयं भी ऐसी व्यवस्थाएँ विकसित करना है, जिनसे आम नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती परिवहन मिल सके।

आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप नई पहल

25 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में इस सेवा का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर सात शहरों को जोड़ने के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरुआत की गई।

इस सेवा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे केवल कुछ शहरों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक स्तर पर विकसित करने की योजना है। आने वाले समय में 3,500 से अधिक मार्गों पर 15,000 से अधिक बसों का चरणबद्ध विस्तार प्रस्तावित है। इसके माध्यम से प्रदेश की 75 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों तक परिवहन सुविधा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

यदि इस योजना को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और प्रमुख शहरों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इसका लाभ विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों, व्यापारियों, महिलाओं, बुजुर्गों और उन सभी लोगों को मिलेगा, जो दैनिक आवश्यकताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं।

इलेक्ट्रिक बसें और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन

इस पहल का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देना है।  रीवा को  6 इलेक्ट्रिक बसें मिली है।

यह पहल वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप है। बढ़ती महँगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना आवश्यक है।

यदि लोगों को अच्छी सड़कें, समय पर चलने वाली बसें, सुविधाजनक यात्रा और उचित किराये पर परिवहन उपलब्ध हो, तो वे निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना पसंद कर सकते हैं।

इससे एक ओर परिवारों के परिवहन खर्च में कमी आ सकती है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत कम करने में भी सहायता मिल सकती है।

हालाँकि, इसके लिए केवल इलेक्ट्रिक बसें खरीदना पर्याप्त नहीं होगा। चार्जिंग स्टेशनों, बसों के रखरखाव, निर्धारित समय-सारणी और पर्याप्त बस सेवाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान देना होगा।

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर ध्यान

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी कई आधुनिक व्यवस्थाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, इमरजेंसी डोर, जीपीएस आधारित निगरानी, ऑनलाइन टिकटिंग और शिकायतों के समाधान जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

इन व्यवस्थाओं का वास्तविक महत्व इनके प्रभावी संचालन में है। यदि जीपीएस से बसों की निगरानी हो, यात्रियों को ऑनलाइन टिकट आसानी से मिलें और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, तो सार्वजनिक परिवहन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ सकता है।

योजना के अंतर्गत आधुनिक बस स्टॉप, बस टर्मिनल और निजी बस ऑपरेटरों के लिए बस डिपो विकसित करने की भी बात कही गई है। ऐसी सुविधाएँ परिवहन व्यवस्था को अधिक संगठित बनाने में सहायक हो सकती हैं।

वर्ष 2029 तक सभी निर्धारित मार्गों पर भगवा रंग की बसें संचालित करने की योजना भी सामने आई है। इन बसों के माध्यम से प्रमुख शहरों के साथ धार्मिक स्थलों और महानगरों तक आवागमन को सुगम बनाने का लक्ष्य है।

परिवहन क्षेत्र में व्यापक विकास की संभावनाएँ

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को महत्वपूर्ण माना गया है।

उन्होंने मध्य प्रदेश को 972 पीएम ई-बसें मिलने, प्रदेश में 25 हजार इलेक्ट्रिक एसी बसों की आवश्यकता तथा ड्राइविंग प्रशिक्षण और वाहन परीक्षण सुविधाओं के विस्तार से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की।

उन्होंने देश में पेट्रोल, डीजल और गैस के आयात पर होने वाले खर्च को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस संदर्भ में इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना दीर्घकालीन दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

यदि परिवहन सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक होता है, तो इसका लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित बस सेवा उपलब्ध होने से लोगों को इलाज, पढ़ाई, सरकारी कार्यालयों और बाजारों तक पहुँचने में आसानी हो सकती है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन को केवल यातायात की व्यवस्था मानना उचित नहीं होगा; यह सामाजिक और आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

सरकारी तंत्र की मजबूती ही जनता के विश्वास का आधार

आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकारें निजी क्षेत्र के विकास के साथ-साथ अपनी सार्वजनिक सेवाओं को भी मजबूत बनाएँ। निजी क्षेत्र प्रतिस्पर्धा और निवेश के माध्यम से विकास में योगदान दे सकता है, लेकिन प्रत्येक आवश्यक सेवा को केवल लाभ-हानि के व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।

सार्वजनिक परिवहन जैसी सेवाओं का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक लोगों तक आवश्यक सुविधा पहुँचाना भी है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ निजी ऑपरेटरों के लिए पर्याप्त लाभ की संभावना नहीं होती, वहाँ सरकारी परिवहन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

बेशक, सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही, वित्तीय अनुशासन और कुशल प्रबंधन अनिवार्य हैं। सरकार के पास संसाधन होने के साथ-साथ उन्हें सही ढंग से संचालित करने की इच्छाशक्ति और क्षमता भी होनी चाहिए।

यदि सरकारी बसें समय पर चलें, किराया उचित हो, यात्रियों को सुरक्षा मिले और ग्रामीण क्षेत्रों तक नियमित परिवहन उपलब्ध हो, तो जनता स्वाभाविक रूप से इस सेवा से जुड़ेगी। ऐसी स्थिति में सरकार का तंत्र मजबूत होगा और जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।

मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा इसी दिशा में एक सराहनीय पहल है।रीवा में इसके तहत 6 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की गई हैं जिसे उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया‌ ‌ ।

सरकार की मजबूती केवल उसके अधिकारों और संसाधनों में नहीं, बल्कि जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने की उसकी क्षमता में निहित होती है। सुगम परिवहन सेवा यदि अपने उद्देश्यों को पूरा करती है, तो यह न केवल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को भी मजबूत करेगी।

24 अक्टूबर 2026

अजय नारायण ‌‌त्रिपाठी “अलखू”

 

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