प्रशासन की कार्रवाई, कोचिंग में ताला और बीच में पिसते छात्र

प्रशासन की कार्रवाई, कोचिंग में ताला और बीच में पिसते छात्र
लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने की दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के कारण 15 छात्रों और कर्मचारियों की जान चली गई। इस घटना के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू हुई। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपी नगर सहित कई शहरों में भी प्रशासन सक्रिय हुआ और जिन संस्थानों में फायर सेफ्टी के मानक पूरे नहीं मिले, उन पर कार्रवाई करते हुए कई कोचिंग संस्थानों को बंद करा दिया गया।इस तरह आठ कोचिंग संस्थान सील हुए सुनने में आया है कि कुछ को लाखों का जुर्माना भी हुआ है।
प्रशासन का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, इसलिए नियमों का पालन कराना आवश्यक है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब ये संस्थान वर्षों से संचालित हो रहे थे, तब नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हुए? यदि समय-समय पर जांच होती और कमियों को पहले ही दूर करा लिया जाता, तो आज हजारों छात्रों की पढ़ाई बीच में नहीं रुकती।
दूसरी ओर, कोचिंग संस्थानों की भी जिम्मेदारी कम नहीं है। जो संस्थान विद्यार्थियों को भविष्य निर्माण और जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ पढ़ाते हैं, उन्हें स्वयं कानून और सुरक्षा मानकों का पालन करने में सबसे आगे होना चाहिए। यदि फायर सेफ्टी जैसी मूलभूत व्यवस्था तक नहीं है, तो यह गंभीर लापरवाही है।
भोपाल के एमपी नगर में कई संस्थानों को फायर सेफ्टी सुधारने तक बंद कर दिया गया है। कुछ संस्थानों ने काम शुरू कर दिया है, जबकि कुछ पर भारी जुर्माना लगाया गया है। कई छात्रों की कक्षाएं जून से बंद हैं और उन्हें जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों का हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का समय वापस नहीं आएगा।
अक्सर देखा गया है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद प्रशासन सख्ती करता है, कुछ समय तक अभियान चलता है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है। यदि ऐसा ही होता रहा, तो अगली दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। जरूरत इस बात की है कि सुरक्षा नियम केवल हादसों के बाद नहीं, बल्कि नियमित रूप से लागू और निगरानी में रहें।
छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। सरकार को नियमित निरीक्षण और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, वहीं कोचिंग संस्थानों को भी सुरक्षा मानकों का पूरी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। शिक्षा का मंदिर तभी सुरक्षित कहलाएगा, जब वहां पढ़ने वाला हर छात्र निश्चिंत होकर अपने भविष्य का निर्माण कर सके।
06 जुलाई 2026
अजय नारायण त्रिपाठी “ अलखू ”