महाराष्ट्र में बंधक बनाए गए रीवा के पांच नाबालिगों सहित 10 श्रमिकों की सकुशल घर वापसी

महाराष्ट्र में बंधक बनाए गए रीवा के पांच नाबालिगों सहित 10 श्रमिकों की सकुशल घर वापसी
कलेक्टर की संवेदनशीलता से तत्काल कार्रवाई, संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र पहुंचकर कराया रेस्क्यू
रीवा 17 सितम्बर 2026. महाराष्ट्र के सतारा जिले में बंधक बनाए गए रीवा के पांच नाबालिग बच्चों सहित 10 श्रमिकों को जिला प्रशासन की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई से सकुशल मुक्त कराकर रीवा वापस लाया गया। रेस्क्यू के बाद नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उन्होंने काम दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र ले जाने और धमकाकर काम कराने की जानकारी दी। गत 11 सितंबर को सतारा, महाराष्ट्र से एक नाबालिग बालक ने फोन के माध्यम से रीवा जिला कलेक्टर श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी को सूचना दी कि उसे और अन्य बच्चों को वहां बंधक बनाकर रखा गया है। कलेक्टर ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जिला पुलिस अधीक्षक श्री गुरुकरण सिंह से समन्वय किया तथा श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को महाराष्ट्र रवाना करने के निर्देश दिए। प्रशासन द्वारा गठित टीम में श्रम निरीक्षक श्री अंकुर यादव एवं श्री सुशील कुमार, पुलिस उपनिरीक्षक श्री शैलेन्द्र सिंह तथा आरक्षक श्री गंजन केवट एवं श्री दुर्गेश नन्दन पांडे शामिल रहे। टीम ने सतारा पुलिस और स्थानीय प्रशासन से समन्वय करते हुए लोणंद तहसील क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और पांच नाबालिग बच्चों सहित सभी 10 श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए बच्चों ने बाल कल्याण समिति के समक्ष बताया कि स्थानीय एजेंट बृजेश पाल उन्हें काम दिलाने का लालच देकर महाराष्ट्र ले गया था। उन्हें 17-18 हजार रुपये वेतन का प्रलोभन दिया गया था और बताया गया था कि उन्हें केवल बीयर की बोतलों पर स्टिकर लगाने का काम करना होगा। महाराष्ट्र पहुंचने के बाद उन्हें कथित रूप से गन्ने के खेत में काम करने के लिए कहा गया। बच्चों के अनुसार, गन्ने के खेत में काम करने से इनकार करने पर बृजेश पाल और सतारा के एक अन्य एजेंट शनि भाऊ ने उन्हें धमकाया। उनसे कहा गया कि वापस जाने के लिए घर से एक लाख रुपये मंगवाने होंगे, अन्यथा एक वर्ष तक काम करना पड़ेगा। विरोध करने पर मारपीट की धमकी भी दी गई। विषम परिस्थितियों के बीच एक बच्चे ने साहस दिखाते हुए अपने गांव में फोन किया और जिला कलेक्टर का संपर्क नंबर प्राप्त कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लिए टीम रवाना की। स्थानीय प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस और बाल कल्याण समिति के सहयोग एवं समन्वय से सभी बच्चों और श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर रीवा लाया गया।
रीवा पहुंचने पर सभी श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा उनके रहने और भोजन की तत्काल व्यवस्था की गई। नाबालिग बच्चों को बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिला कलेक्टर ने पुलिस और संबंधित विभागों को बाल दुर्व्यापार, बाल श्रम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बच्चों के पुनर्वास और उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए भी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया है। बच्चों के फॉलोअप, आवश्यक सहयोग और समन्वय के लिए जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के सहयोगी संगठन अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी द्वारा भी आवश्यक भूमिका निभाई जा रही है, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी बच्चे को नौकरी या अन्य किसी बहाने से दूसरे जिले अथवा राज्य में ले जाने, बाल श्रम कराने, बंधक बनाने या किसी प्रकार के शोषण की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा संबंधित पुलिस और प्रशासन को सूचना दें। समय पर मिली सूचना किसी बच्चे को शोषण और तस्करी से बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।