जल गंगा संवर्धन अभियान खेती के विकास का आधार

जल गंगा संवर्धन अभियान खेती के विकास का आधार रीवा 02 अप्रैल 2026. जीव जगत, पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के जीवन का आधार पानी है। पानी का विवेकपूर्ण उपयोग और भावी पीढ़ी के लिए पर्याप्त जल सुरक्षित रखना हम सबकी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। इसलिए जल संरक्षण और संवर्धन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत ग्राम घोपी विकासखंड गंगेव में जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, सरपंच समरजीत पटेल, आशीष पटेल एवं आसपास के गांवों के किसान शामिल हुए। संगोष्ठी में गंगेव ,मढ़ीखुर्द पचपहरा, सेंधहा एवं अन्य गांवों के किसान शामिल हुए। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के नेतृत्व में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कृषि विभाग लगातार भागीदारी निभा रहा है। उप संचालक कृषि यूपी बागरी ने बताया कि विभाग की आत्मा परियोजना द्वारा ग्राम घोपी में जल जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें आत्मा परियोजना के दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान जल के संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और नदियों-जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण जन-अभियान है। इसका उद्देश्य “हर बूंद की रक्षा” और “जल आत्मनिर्भरता” को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि जल कृषि उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। बदलते जलवायु परिदृश्य और घटते भूजल स्तर को देखते हुए किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई, मल्चिंग तथा वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न ग्रामों से आये किसानों को यह भी बताया गया कि फसल चक्र अपनाने, प्राकृतिक एवं जैविक पदार्थों के उपयोग और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। कृषि विभाग द्वारा कृषको से अपील की गई कि वे जल संरक्षण को अपनी खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं और पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग करें। जल संरक्षण से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जल संसाधन सुरक्षित रहेंगे। “जल है तो कल है” इस संदेश के साथ किसानों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। संगोष्ठी के में शिवशरण सरल वरिष्ठ क़ृषि विकास अधिकारी द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बलराम तालाब, प्रधानमंत्री क़ृषि सिचाई योजना से स्प्रिंकलर एवं ड्रिप मे अनुदान की प्रक्रिया, नरवाई प्रबंधन पर चर्चा किसानों से की गयी। साथ ही उद्यानिकी, पशुपालन विभाग की हितग्राही योजनाओ की जानकारी दी गयी। संगोष्ठी में क़ृषि विस्तार अधिकारी, दीपिका तिवारी तकनीकी प्रबंधक और किसान उपस्थित रहे।

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