सृजन, संवेदना और संस्कारों से आलोकित रहा एमसीयू रीवा परिसर

तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव प्रतिभा-2026 का हुआ समापन.
सृजन, संवेदना और संस्कारों से आलोकित रहा एमसीयू रीवा परिसर
रीवा 20 मार्च 2026. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय रीवा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक एवं सृजनात्मक उत्सव “प्रतिभा 2026” का समापन हुआ। मंच पर हर चेहरे, हर विचार और हर अभिव्यक्ति में प्रतिभा झलकती दिखाई दी। तीन दिनों तक परिसर रचनात्मकता, बौद्धिकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र बना रहा, जहाँ युवा मनों ने अपनी संवेदनाओं को शब्द, रंग, स्वर और अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिसर निदेशक डॉ. सत्येंद्र डेहरिया एवं एडजंक्ट प्रोफेसर जयराम शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. डेहरिया ने कहा कि प्रतिभा केवल प्रतियोगिताओं में जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्वयं को पहचानने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने की प्रक्रिया है। शिक्षा तब पूर्ण होती है, जब उसमें संवेदना और संस्कार का समावेश हो। यही ‘प्रतिभा’ जैसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य है। समारोह में श्री शुक्ला ने अपने साहित्यिक अंदाज में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “शब्दों की दुनिया में वही आगे बढ़ता है, जिसके भीतर जिज्ञासा जिंदा रहती है। पत्रकारिता केवल खबर लिखना नहीं, बल्कि समय की धड़कनों को सुनना और समाज की आत्मा को शब्द देना है। आप सभी अपने भीतर उस संवेदनशीलता को बचाए रखें, जो आपको भीड़ से अलग पहचान दिलाती है।
उद्घाटन दिवस की सुबह रंगों के सौंदर्य से सजी रंगोली प्रतियोगिता से आरंभ हुई। छात्र-छात्राओं ने भारतीय संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक विषयों को रंगों के माध्यम से जीवंत कर दिया। इसके पश्चात फीचर लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शब्दों के माध्यम से समाज, संस्कृति और समकालीन जीवन के विविध आयामों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने विचारों को बिना पूर्व तैयारी के सशक्त ढंग से प्रस्तुत कर यह सिद्ध किया कि युवा मन जानकारी सहित दृष्टि भी रखते हैं। पोस्टर मेकिंग और कार्टून मेकिंग प्रतियोगिताओं में सामाजिक सरोकारों पर तीखी और रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ सामने आईं, जहाँ चित्रों ने शब्दों से अधिक प्रभाव छोड़ा, वहीं वेबसाइट डिजाइनिंग प्रतियोगिता ने तकनीक और सृजनात्मकता के अद्भुत संगम को प्रदर्शित किया।
समारोह के दूसरे दिन परिसर में विचारों की गंभीरता और अभिव्यक्ति की परिपक्वता का संगम देखने को मिला। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में कैमरे ने क्षणों को संवेदनाओं में बदल दिया, तो निबंध लेखन में विचारों ने शब्दों का आकार लिया। स्वरचित काव्य पाठ में युवा कवियों ने अपनी अनुभूतियों को स्वर देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में तर्क और प्रतितर्क के बीच विचारों की परिपक्वता झलकी, जबकि रेडियो कार्यक्रम निर्माण में विद्यार्थियों ने श्रव्य माध्यम की प्रभावशीलता को सृजनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। समापन दिवस पर कला और संस्कृति का ऐसा समागम देखने को मिला, जिसने पूरे आयोजन को एक उत्सव में परिवर्तित कर दिया। मोबाइल शॉर्ट फिल्म में विद्यार्थियों ने समकालीन विषयों को दृश्यात्मक प्रभाव के साथ प्रस्तुत किया, तो प्रश्नमंच (क्विज) में ज्ञान की प्रतिस्पर्धा दिखाई दी। एकल अभिनय में भावों की तीव्रता, एकल गायन (भारतीय एवं पाश्चात्य) में सुरों की मधुरता, वाद्ययंत्र में लय की गूंज और एकल नृत्य में अभिव्यक्ति की लचक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकगण, डॉ. बृजेश पाण्डेय, डॉ. विनोद दुबे, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. वंदना तिवारी, डॉ. नीति मिश्रा, डॉ. नवीन तिवारी, सौरभ मिश्रा, तरुण त्रिपाठी, राहुल चतुर्वेदी, डॉ. दिव्य शंकर मिश्र, अंबुज पाण्डेय, आरती श्रीवास्तव, प्रदीप शुक्ला, कनिष्क तिवारी, जयप्रकाश पटेल, सोमेंद्र सिंह, अपर्णा गोस्वामी सहित समस्त शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारीगण की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।