डीजीएमओ द्वारा जरी वक्तव्य

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मैंने कल (18 सितंबर, 2016) आप सबको आतंकी घटना की जानकारी दी थी। उरी सेना परिसर के भीतर और आसपास की गहरी छान-बीन के बाद सैन्य कार्रवाई को पूरा कर लिया गया है। मारे गये आतंकवादियों के पास से चार एके-47 राइफलें, चार अंडर बैरल ग्रेनेड लान्चर, 39 अंडर बैरल ग्रेनेड लान्चर ग्रेनेड, पांच हैंड ग्रेनेड, दो रेडियो सेट, दो जीपीएस, दो मैप शीट्स, दो मैट्रिक्स शीट, एक मोबाइल फोन और भारी मात्रा में खाने का सामान तथा दवाओं के पैकेट बरामद हुये हैं। इन सभी पर पाकिस्तानी मार्किंग्स हैं।

आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों में पिछले तीन-चार वर्षों की तुलना में काफी इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में घुसपैठ की 17 कोशिशें की गयीं जिन्हें भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर नाकाम कर दिया। जम्मू-कश्मीर में कुल 110 आतंकवादियों को ठिकाने लगाया गया, जिनमें से 31 आतंकवादियों को नियंत्रण रेखा पार करने की कोशिशों के दौरान मारा गया। इससे संकेत मिलता है कि नियंत्रण रेखा के पार से घुसपैठ की हताशा भरी कोशिशें की जा रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा आतंकवादियों को कश्मीर में घुसाया जाये ताकि हमारे क्षेत्र में तनाव और गड़बड़ी पैदा की जा सके। घुसपैठ की दो कोशिशें यानी 11 सितंबर, 2016 को पुंछ में और 18 सितंबर, 2016 को उरी में की गयीं जिन्हें भारतीय सेना ने प्रत्येक कार्रवाई के दौरान चार आतंकवादियों को मारकर नाकाम कर दिया।

भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर और अंदरूनी इलाकों में आतंकवादी स्थिति से निपटने में यथेष्ट संयम का प्रदर्शन किया है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर हम इस तरह की हिंसात्मक और आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिये पूरी क्षमता रखते हैं। हम इस तरह की किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का सही समय और स्थान पर जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

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