सुपर स्पेशलिटी रीवा अस्पताल ने रचा इतिहास

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने रचा इतिहास
गर्भवती और दिव्यांग महिलाओं की जान बचाकर नए कीर्तिमान स्थापित किए

रीवा 15 जनवरी 2026. सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लगातार ह्मदय रोगों के जटिलतम प्रोसीजर में नए-नए कीर्तिमान रच रहा है। गतदिनों कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने दो अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रकरणों में सफल बैलून मिट्रल वात्युलोप्लास्टी प्रक्रिया करके मरीजों की जीवन रक्षा की, जो विध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।

गतिदिनों 32 वर्षीय एक गर्भवती महिला कार्डियालाजी विभाग के डॉ. एस.के. त्रिपाठी के पास आई, जिन्हें न्यूनतम शारीरिक गतिविधि में भी सांस फूल रही थी और लेटने पर भी सोना मुश्किल हो रहा था। इकोकार्डियोग्राफी से पता चला कि मरीज का मिट्रल वाल्व पूरी तरह सिकुड़ चुका था। गर्भावस्था जारी रखने में मरीज के जीवन को गंभीर खतरा था। महिला की पिछली दो प्रेग्नेंसी पहले ही असफल हो चुकी थी, इसलिए यह गर्भावस्था उनके लिए अत्यंत बहुमूल्य थी। ओपन हार्ट सर्जरी का विकल्प जोखिमपूर्ण होने के कारण टीम ने बेलून मिटूल बाल्युलोप्लास्टी (एग्ज्) का निर्णय लिया। हाई रिस्क लेकर डॉ. एस.के. त्रिपाठी और डॉ. सुरेंद्र तिवारी ने यह प्रक्रिया अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न की। अब महिला पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और अपनी गर्भावस्था सुरक्षित रूप से जारी रख पाएंगी। यह रीवा में इस प्रकार का पहला प्रकरण है। जिसे सफलतापूर्वक इलाज दिया गया।

इसी प्रकार एक अन्य महिला, जिन्हें बचपन में पोलियोमाइलाइटिस की बीमारी के कारण एक पैर पतला और कमजोर हो गया था। इस शारीरिक चुनौती के कारण प्रक्रिया और अधिक जटिल थी। फिर भी डॉ. सुरेंद्र तिवारी, डॉ. पी.डी. त्रिपाठी और डॉ. एस.के. त्रिपाठी की टीम ने चुनौती स्वीकार की और सफलतापूर्वक पूरी की। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। टीम में कैथ लैब तकनीशियन जय नारायण मिश्रा, सत्यम शर्मा, मनीष तिवारी, सुमन साहू सुधांशु तिवारी, विजय, सोनाली, निकित तथा नर्सिंग स्टाफ मनीषा, शांति, सतेंद्र, किशोर, निधी, प्रीती, ललिता ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन सफलताओ के लिये डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और अधीक्षक डॉ अक्षय श्रीवास्तव ने पूरी कार्डियोलॉजी टीम को बधाई दी है।

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