गुरू के सम्मान और उनके ज्ञान के प्रति आभार प्रकट करने का पावन पर्व है

गुरू के सम्मान और उनके ज्ञान के प्रति आभार प्रकट करने का पावन पर्व है
गुरू पूर्णिमा – आर के जैन

रीवा 10 जुलाई 2025. गुरू पूर्णिमा हिंदू धर्म में गुरु के सम्मान और उनके ज्ञान के प्रति आभार प्रकट करने का पावन पर्व है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया। यह पर्व आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। गुरू पूर्णिमा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का भी अवसर होता है। यह पर्व गुरू और शिष्य के बीच विश्वास और समर्पण के अटूट बंधन को दर्शाता है। उक्त उदगार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बदरॉव में गुरू पूर्णिमा उत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संस्था के प्राचार्य आर के जैन ने व्यक्त किये।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व अतिथि रामरूप मिश्रा ने कहा कि गुरू पूर्णिमा केवल वेदव्यास जी का जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवन में गुरू की भूमिका को समझने और उनका आभार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण दिन है, जो हर किसी को ज्ञान, अनुशासन और आत्मिक प्रगति की ओर प्रेरित करता है ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय की माध्यमिक शिक्षक श्रीमती अदिति पाठक ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों व विद्यालयों में 9 एवं 10 जुलाई को गुरू पूर्णिमा उत्सव आयोजित किये जाने का कार्यक्रम जारी किया गया है। जिसमे छात्र, छात्राओं की विशेष सहभागिता में छात्रों के मध्य निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी अनीता शर्मा, वरिष्ठ शिक्षक एम डी सिंह, भागवत प्रसाद पाण्डेय, अमरजीत पाण्डेय, श्रीमती प्रतिमा द्विवेदी ने छात्रों के मध्य अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन शिक्षक विद्यामणि शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जीत नारायण चतुर्वेदी, विजय पाल सिंह, शान्ति गुप्ता तथा विद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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