टीआरएस कालेज में आयोजित हुई राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी

रीवा 25 मार्च 2023. शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के समाज कार्य विभाग एवं आई. क्यू.ए.सी.द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी (प्रगतिशील भारत की आजादी के 75 वर्षः चुनौतियां एवं संभावनाएं) का मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन परियोजना भोपाल के प्रायोजकत्व में शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के मुख्य अतिथि राजेंद्र शुक्ल, पूर्व मंत्री एवं विधायक रीवा, विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र ताम्रकार अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति, अखिलेश गुप्ता, अध्यक्ष गवर्निंग बॉडी तथा ब्यकंटेश पाण्डेय अध्यक्ष नगर निगम रीवा तथा अध्यक्ष संरक्षक/ प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी प्राचार्य तथा मुख्य वक्ता डॉ. पी. के. गुप्ता, समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश रहे। डॉ. महेश शुक्ल तथा डॉ. एस.पी शुक्ल की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का महाविद्यालय परिवार की तरफ से स्वागत किया। संगोष्ठी के उद्देश्यों का वाचन संयोजक डॉ. अखिलेश शुक्ल द्वारा किया गया। राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध पत्रों को आई.एस.बी.एन युक्त पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिसका अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र शुक्ल, पूर्व मंत्री, एवं विधायक रीवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान केन्द्रीय नेतृत्व के कारण स्थापित की है। सभी क्षेत्रों में भारत ने विकास किया है। आज नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय मे वृद्धि हुई है। कोविड़ 19 के दौरान भारत ने अपने नागरिकों के साथ-साथ विश्व के जनमानस को भी सहायता की है। आने वाले समय में भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल होगा। विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र ताम्रकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम अपनी विरासत को पहचानते हुए अपने कर्तव्यों को भी याद रखे।

डॉ. पी.के. गुप्ता, समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग विश्वविद्यालय लखनऊ, ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि विंध्यांचल के महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के समाज कार्य विभाग द्वारा अति महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया है, जो भारत सरकार के आजादी के अमृत महोत्सव के सापेक्ष एक सराहनीय प्रयास है। अमृत काल के पॉच मुख्य संकल्प लिए गए है। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना, बंधनों के निशान को हटाना, देश की विरासत पर गर्व करना, एकता पर गर्व करना, अपने कर्तव्यों को पूरा करना। डॉ. गुप्ता ने अपने उद्बोधन में भारतीय समाज के सापेक्ष विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, विकास का निर्घारक निर्यात, खाद्यान्न उत्पादन में उछाल, उर्जा के क्षेत्र में वृद्धि, राष्ट्रीय राजमार्गों का मजबूत नेटवर्क, वाहनों के रजिस्ट्रेशन में वृद्धि, तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार, साक्षरता, उच्च शिक्षा तक पहुॅच आदि विभिन्न बिंदुओं का विश्लेषण किया। प्रथम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता डॉ. महानन्द द्विवेदी ने की तथा प्रतिवेदक की भूमिका डॉ. विभा श्रीवास्तव ने निभाई। प्रथम सत्र में शिखा तिवारी, विकास शुक्ला, डॉ. कमलेश चॉवले, प्रकाश कुमार मिश्रा, रागिनी पाण्डेय आदि ने शोध पत्रों का वाचन किया।

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