संविधान की मूल भावना के अनुरूप अधिकारी कार्य करेंगे – कलेक्टर

रीवा 26 नवम्बर 2020. कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में संविधान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित संविधान दिवस के आयोजन का सजीव प्रसारण किया गया। इसमें महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने केवड़िया गुजरात में आयोजित समारोह में संविधान की प्रस्तावना तथा शपथ का वाचन किया। कलेक्ट्रेट सभागार से ऑनलाइन जुड़कर सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने इसका अनुसरण किया।
कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। विश्व के सभी प्रमुख देशों के संविधानों का अध्ययन मनन करके उनके श्रेष्ठ प्रावधानों को देश के संविधान में शामिल किया गया है। भारत के संविधान की प्रशंसा प्रत्येक देश करता है। हर नागरिक को संविधान की प्रमुख बातों तथा प्रावधानों का अध्ययन करना चाहिए। सभी अधिकारी संविधान का भली भांति अध्ययन करें। संविधान की मूल भावना के अनुरूप अपने शासकीय कार्य का संपादन करें।
कलेक्टर ने कहा कि देश के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को अवसर की समानता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। संविधान ने ही हमें आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक समानता का भी अधिकार दिया है। संविधान में मूल कत्र्तव्यों तथा मूल अधिकारों का वर्णन किया गया है। संविधान में देश के किसी भी नागरिक के प्रति जाति, धर्म, समुदाय अथवा लिंग के आधार पर किसी तरह के विभेद का निषेध किया गया है। संविधान देश की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का आधार है। संविधान के प्रावधानों की व्याख्या का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को है। देश की न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा विधायिका का संचालन संवैधानिक प्रावधानों से ही होता है। एक नागरिक के रूप में सभी प्रमुख अधिकार हमें संविधान से ही मिले हैं। कार्यक्रम में एडीएम श्रीमती इला तिवारी, संयुक्त कलेक्टर एके झा, संयुक्त कलेक्टर अंजली द्विवेदी तथा कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन संचालक पिछड़ावर्ग सीएल सोनी ने किया।

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