पीआईयू के अधिकारी निर्माण कार्य प्रारंभ करने के पूर्व भूमि का स्थल निरीक्षण अनिवार्य रूप से करें – कमिश्नर

पीआईयू के अधिकारी निर्माण कार्य प्रारंभ करने के पूर्व भूमि का स्थल निरीक्षण अनिवार्य रूप से करें – कमिश्नर
कमिश्नर ने निर्माण कार्यों में एक से दो वर्ष की देरी पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की
फील्ड में जाए बिना ड्राइंग व डिजाइन बनाने वाले कंसल्टेंटों के विरुद्ध कार्रवाई करें
निर्माण कार्य पूरा करने अतिरिक्त मशीन एवं अमला लगाया जाए
समय पर कार्य पूर्ण न करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध टर्मिनेट एवं ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई की जाए
कमिश्नर ने पीआईयू , पीएचई एवं जल निगम के कार्यों की समीक्षा की
रीवा 29 अक्टूबर 2026. जहां निर्माण कार्य होने हैं वहां निर्माण कार्य प्रारंभ होने के पूर्व पीआईयू
के अधिकारी भूमि और स्थल का निरीक्षण अनिवार्य रूप से कर लें। बाद में यह समस्या न आए कि
जमीन पथरीली, उबड़-खाबड़ थी, इसलिए निर्माण कार्य संभव नहीं हो पाया। स्थल निरीक्षण के बाद ही
निर्माण कार्य के लिए टेंडर लगाए जाएं। उक्त निर्देश रीवा संभाग कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने पीआईयू,
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जल निगम विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में दिए। कमिश्नर ने कहा
कि निर्माण कार्य के टेंडर लगाने के बाद यदि जमीन की रिवाइज करने की जरूरत पड़ी तो इसके लिए
संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पर जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कमिश्नर ने निर्माण कार्य में अनावश्यक रूप से 1 से 2 वर्ष की देरी पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की और
कहा कि कार्य के समय सीमा में पूरे न होने पर मैटेरियल कॉस्ट बढ़ता है और शासन को अनावश्यक
राशि की हानि उठानी पड़ती है। कमिश्नर ने सभी महाप्रबंधक को निर्देश दिए कि वह ठेकेदारों के कार्य
की सतत मॉनीटरिंग करें। कमिश्नर ने कहा कि बजट आवंटन के अभाव में निर्माण कार्य किसी भी
स्थिति में रुकने नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य का ठेका सक्षम ठेकेदार को ही दिया जाए,
जिससे राशि आवंटन में देरी होने पर भी वह कार्य कर सके। कमिश्नर ने बिना फील्ड में जाए ड्राइंग
और डिजाइन बनाने वाले कंसल्टेंटों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे कंसल्टेंट
जो स्थान और भूमि का निरीक्षण किए बिना ड्राइंग एवं डिजाइन बनाते हैं उनकी सूची बनाकर एसीएस
लोक निर्माण विभाग को भेजी जाए। चीफ इंजीनियर का यह प्रमुख दायित्व है कि वह अपने अधीनस्थ
इंजीनियर को पहले जमीन का मुआयना कराए और उसके बाद ही टेंडर निकाला जाए, नहीं तो लेआउट
में दिक्कत होगी। कमिश्नर ने हिदायत दी की इस्टीमेट रिवाइज करने वाले एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के
विरुद्ध नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसकी गलती से
रिवाइज्ड इस्टीमेट बढ़ाया गया है। कमिश्नर ने संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र पटेल को निर्देश दिए कि वह एक
टीम बनाकर रिवाइज्ड इस्टीमेट वाले कार्यों की जांच कराएं।
कमिश्नर ने समय पर कार्य पूर्ण न करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध टर्मिनेट एवं ब्लैक लिस्ट की
कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बताया गया कि कुछ स्कूल भवन , छात्रावास, उप स्वास्थ्य केंद्र, शासकीय
आवास का निर्माण कार्य, पानी की टंकी का निर्माण कार्य, रिकॉर्ड रूम, सर्किट हाउस, सांदीपनि स्कूल का
निर्माण कार्य भूमि आवंटन न होने, ड्राइंग एवं डिजाइन फाइनल न होने, बजट आवंटन प्राप्त न होने के
चलते धीमी गति से चल रहा है। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि अतिरिक्त टीम बनाकर एवं अतिरिक्त
मशीन लगाकर निर्माण कार्यों को तेज गति से पूरा किया जाए। सभी निर्माण कार्य पूर्ण करने के
पश्चात अनिवार्य रूप से संबंधित विभाग को हैंडओवर भी किया जाए। कमिश्नर ने बैठक में पीआईयू
विभाग द्वारा बनाए जा रहे हैं उप स्वास्थ्य केंद्र, सांदीपनि स्कूल, सर्किट हाउस, हाई स्कूल, छात्रावास,
नर्सिंग कॉलेज, चिकित्सा महाविद्यालय में कक्ष, कुटुंब न्यायालय, टंकी के निर्माण कार्य की प्रगति की
समीक्षा की।
कमिश्नर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा की। बताया गया कि संभाग में
कुल 1467 एकल नल ग्राम योजना, 4374 समूह जल योजना संचालित है। कमिश्नर ने सभी स्वीकृत
नल जल योजना का कार्य जल्द से जल्द कंप्लीट करने के निर्देश दिए, साथ ही कहा कि संभाग के
जिलों में यह घटना प्रकाश में आई है कि नल जल योजना के तहत बनाई गई पानी की टंकी सरकारी
जमीन पर न बनाकर निजी व्यक्ति की जमीन पर बना दी गई है। इस स्थिति पर सख्त नाराजगी
व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने निर्देश दिए कि पानी की टंकी का निर्माण करने से पूर्व स्थानीय पटवारी
से जमीन की जानकारी अनिवार्य रूप से ली जाए। पानी की टंकी का निर्माण सरकारी जमीन पर ही
किया जाए और यदि यह स्थिति निर्मित हुई है कि निजी जमीन पर पानी की टंकी का निर्माण कार्य
किया जा चुका है तो अदला-बदली का केस लगाया जाए। बताया गया कि संभाग में कुल 386413
एफएचटीसी का लक्ष्य प्रस्तावित था। इसके विरुद्ध अब तक 345080 एफएचटीसी पूर्ण कर ली गई है।
कमिश्नर ने निर्देश दिए की नल जल योजना का कार्य पूर्ण कर कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र अनिवार्य
रूप से दिया जाए।
कमिश्नर ने बैठक में नल जल योजनाओं की माहवार दिए लक्ष्य एवं उपलब्धियां तथा क्रियाशील
घरेलू नल कनेक्शन की माहवार लक्ष्य एवं उपलब्धियों की समीक्षा की। कमिश्नर ने जल जीवन मिशन
अंतर्गत पाइपलाइन, उच्च स्तरीय टंकी के निर्माण कार्य एवं संपवेल की अदयतन स्थिति की जानकारी
ली। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि नल जल योजना के कार्य के दौरान जो मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं उनकी
मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। बताया गया कि लगभग शत-प्रतिशत क्षतिग्रस्त मार्गों की
मरम्मत का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कमिश्नर ने क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत के कार्य की
गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए और कहा कि सभी संबंधित अधिकारी इस आशय का प्रमाण पत्र दे की
शत-प्रतिशत क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत करा दी गई है।
कमिश्नर ने जल निगम के कार्यों की समीक्षा करते हुए रीवा बाणसागर, टमस समूह जलप्रदाय
एवं कंदेला समूह जलप्रदाय, गोंडा देवसर जल समूह, बैढ़न एक एवं दो समूह जलप्रदाय की समीक्षा की
और निर्देश दिए कि जल निगम जिन टंकियों का निर्माण कार्य प्रारंभ कर चुका है उन सभी टंकियों का
निर्माण कार्य डेढ़ माह में पूर्ण कर ले। समीक्षा बैठक के दौरान संयुक्त आयुक्त श्री वीरेंद्र पटेल एवं सभी
संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।