भारत की अमूल्य पांडुलिपि विरासत को सहेजने के लिए संस्कृति मंत्रालय की अनूठी पहल

भारत की अमूल्य पांडुलिपि विरासत को सहेजने के लिए संस्कृति मंत्रालय की अनूठी पहल
ज्ञानभारतम्’ ऐप से घर बैठे डिजिटल सर्वे में भाग ले सकेंगे नागरिक
रीवा 21 जून 2026. संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश की अमूल्य ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय पहल ‘ज्ञानभारतम् मिशन’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत भारत की प्राचीन सभ्यताओं के ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, परंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए ‘ज्ञानभारतम् मोबाइल एप्लीकेशन’ (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण) लॉन्च किया गया है। जिले के ऐसे समस्त नागरिक, संस्थाएँ, मंदिर या पुस्तकालय जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियाँ उपलब्ध हैं, वे इस ऐप के माध्यम से सीधे राष्ट्रीय सर्वेक्षण का हिस्सा बनकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं। रीवा जिले में पाँच हजार से अधिक पाण्डुलिपियों को ऐप में दर्ज किया गया है। ‘ज्ञानभारतम्’ ऐप में कोई भी उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी के माध्यम से बेहद सुरक्षित तरीके से लॉगिन कर सकता है। लॉगिन करने के पश्चात उपयोगकर्ता अपने द्वारा भेजे गए सर्वे रिक्वेस्ट के सबमिशन का पूरा इतिहास देख सकते हैं तथा उसकी वर्तमान स्टेटस को आसानी से पता लगा सकते हैं।
ऐप को पहली बार शुरू करते समय डिवाइस की लोकेशन एक्सेस अनुमति देना आवश्यक होगा। यह अनुमति केवल पांडुलिपि के यथार्थ और सटीक स्थान के प्रमाणिक अभिलेखन के उद्देश्य से ली जाती है। ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और जन-उपयोगी बनाया गया है। ऐप में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और प्राकृत सहित कुल 23 भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन मुख्य सर्वे फॉर्म की प्रविष्टियाँ अंग्रेजी में ही भरी जाएंगी। उपयोगकर्ता अपनी श्रेणी के अनुसार व्यक्तिगत संरक्षक, संस्था/पुस्तकालय/ट्रस्ट, आम नागरिक या मिशन के अधिकृत सर्वेक्षक के विकल्प का चयन कर सकते हैं। यहाँ संस्था अथवा व्यक्तिगत संरक्षक का नाम, मोबाइल नंबर और पदनाम दर्ज करना होता है ताकि मिशन टीम भविष्य में सीधे संपर्क कर सके। स्थान का निर्धारण करने के लिए राज्य, जिला, पूरा पता और पिन कोड अंकित करना होगा। साक्ष्य के तौर पर पांडुलिपि के कवर पेज या पहले पृष्ठ का कम से कम एक स्पष्ट और बिना धुंधलापन वाला फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। अंतिम चरण में पांडुलिपि की लिपि, भाषा और सामग्री (जैसे ताड़पत्र, कागज, धातु आदि) की समीक्षा करके सबमिट रिक्वेस्ट पर क्लिक करते ही एक यूनिक रिक्वेस्ट आईडी जनरेट हो जाएगी।

अपनी अमूल्य धरोहर को नष्ट होने से बचाएं – संस्कृति मंत्रालय की इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य उन दुर्लभ ज्ञान-स्रोतों की पहचान करना है जिन्हें संरक्षण, कैटलॉगिंग और डिजिटाइजेशन की तत्काल आवश्यकता है। जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों, प्राचीन मंदिरों, मठों, रियासतकालीन पुस्तकालयों और शोधार्थियों से अपील की गई है कि वे ‘ज्ञानभारतम्’ ऐप के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को पंजीकृत कराएं।