सनातन परंपरा और संस्कृत से ही होगा प्राचीन संस्कृति का संरक्षण – उप मुख्यमंत्री

सनातन परंपरा और संस्कृत से ही होगा प्राचीन संस्कृति का संरक्षण – उप मुख्यमंत्री
संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर का 35 करोड़ रूपये की लागत से होगा निर्माण
गौमाता के आशिर्वाद से ही विकास के सभी कार्य हो रहे हैं – उप मुख्यमंत्री

रीवा 22 मार्च 2026. उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने लक्ष्मणबाग में रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र संस्कृत ज्ञान के कारण छोटी काशी के रूप में विख्यात रहा है। यहां कई गांव में संस्कृत के स्कूल और कॉलेज वर्षों से संचालित हैं। रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय विन्ध्य में संस्कृत के पुन: स्थापना का केन्द्र बनेगा। सनातन परंपरा और संस्कृत से ही हमारी प्राचीन संस्कृति का संरक्षण होगा। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विश्व गुरू बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है आज विश्व में जो भीषण समस्यायें हैं उनका समाधान और विश्वशांति की स्थापना का समर्थ केवल भारत में है। भारत अपने प्राचीन ज्ञान और संस्कृति से दुनिया को नई राह दिखायेगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विन्ध्य के संस्कृत विद्वानों द्वारा संस्कृत के पठन-पाठन केन्द्र और विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लंबे समय तक प्रयास किया गया आज सभी का सपना पूरा होने जा रहा है। लक्ष्मणबाग में 35 करोड़ रूपये की लागत से भव्य संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर एक साल में बना दिया जायेगा। इसमें कॉलेज, छात्रावास, पुस्तकालय तथा विद्यार्थियों के नि:शुल्क भोजन , आवास और पढ़ाई की सुविधा रहेगी। यह परिसर संस्कृत को पुन: स्थापित करने में सफल होगा। सुंदर प्राकृतिक वातावरण, गौमाता और चारधाम के देवताओं के विगृह के सान्निध्य में संस्कृत पुष्पित और पल्लवित होगी। रीवा में भौतिक विकास की गाड़ी अब तेजी से दौड़ रही है। मैं अब गौसेवा और आध्यात्मिक क्षेत्र में अपना मन लगाना चाहता हूँ।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बसामन मामा, हिनौती गौधाम और लक्ष्मणबाग में हजारों गौमाता की सेवा हो रही है। गौमाता के आशिर्वाद से ही विकास के सभी कार्य हो रहे हैं। हमें अपना और मिट्टी का स्वस्थ्य सुधाने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है। गौमाता से प्राप्त गोबर और गोमूत्र से तैयारी खाद से प्राकृतिक खेती करें। सनातन ज्ञान परंपरा और प्राकृतिक खेती से ही हमें विकास और सुख का सही मार्ग मिलेगा। संगोष्ठी में पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के उज्जैन के कुलगुरू प्रो. शिवशंकर मिश्र ने कहा कि विन्ध्यधारा अत्यंत तेजस्विनी है। इसी धारा पर महार्षि बाल्मीकी ने रामायण, महाकवि बाणभट्ट ने कादंबरी की रचना की है। देश की सनातन परंपरा की रक्षा के लिए संस्कृत का विकास आवश्यक है। नवीन परिसर के निर्माण से संस्कृत के पठन-पाठन की उत्तम सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। भारत वर्ष की रक्षा और विकास के लिए हमें वेद, गीता और रामायण की ओर जाना होगा। संगोष्ठी में प्रो. अंजनी प्रसाद पाण्डेय, प्रो. रघुराज तिवारी, प्रो. दिलीप सोनी तथा परिसर प्रभारी डॉ. अनिल मुवेल ने भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। समारोह में जिला रेडक्रास समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, लक्ष्मणबाग के कार्यकारी संचालक तथा एसडीएज हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी, श्री सूर्यकांत चौबे, श्री बलभद्र शुक्ल, श्री आरपी तिवारी, श्री जयराम शुक्ला, श्री राजेश पाण्डेय तथा बड़ी संख्या में विद्वानजन उपस्थित रहे।

Facebook Comments Box

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *