रायपुर कर्चुलियान के किसानों को मिला ‘जवाहर जैव उर्वरक’ का उपहार

रायपुर कर्चुलियान के किसानों को मिला ‘जवाहर जैव उर्वरक’ का उपहार

रीवा 02 मार्च 2026. रायपुर कर्चुलियान विकासखण्ड के ‘आत्मा’ परियोजना के अंतर्गत सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन के तहत ग्राम सगरा और नवागांव के किसानों के लिए एक विशेष नवाचार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को “जवाहर जैव संघटक-क्ष्क्ष्” प्रदान किया गया, जिसका उद्देश्य खेती में मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारना और फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जैव उर्वरकों के माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों का प्रबंधन करना और विभिन्न कीट व्याधियों पर नियंत्रण पाना है। कार्यक्रम में बताया गया कि किसान फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने में कर सकते हैं, जिससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी। कार्यक्रम के दौरान 30 चयनित किसानों को जैव उर्वरक किट बांटी गई और उन्हें इसके सटीक उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया।

किसानों को फसल अवशेषों के माध्यम से 2 माह के भीतर गंधमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। इसके लिए 10 फीट लंबे, 4 फीट चौड़े और 3 फीट गहरे गड्ढे में कचरे की परतें बनाकर उन पर बायोडाइजेस्टर, डेयरी स्लरी और जैव उर्वरक के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने बताया कि 2 लीटर तरल कल्चर को 10-15 लीटर पानी में घोलकर उसे 50-100 किलो कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट के साथ रात भर रखकर सक्रिय किया जा सकता है। इस मिश्रण का एक एकड़ खेत में बुआई या रोपाई से पहले छिड़काव करना अत्यंत लाभकारी होता है। इस कार्यक्रम में ‘आत्मा’ परियोजना के विकासखंड तकनीकी प्रबंधक सपना पाण्डेय, सहायक तकनीकी प्रबंधक प्रतिक्षा सिंह, प्राची शर्मा एवं सेवानिवृत्त कृषि विस्तार अधिकारी बी.पी. पाण्डेय ने भी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

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