गौसेवा हेतु जनप्रतिनिधियों से कमर कसकर आगे आने का विधानसभा में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने किया आह्वान

गौसेवा हेतु जनप्रतिनिधियों से कमर कसकर आगे आने का विधानसभा में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने किया आह्वान

रीवा 25 फरवरी 2026. उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने गौ संरक्षण एवं संवर्द्धन के विषय में विधानसभा में विचार व्यक्त करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गौसेवा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से आग्रह किया कि वे गौसेवा के इस महत्वपूर्ण विषय मे सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित कर ठोस कदम उठाएँ।

उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रति गौवंश प्रतिदिन मात्र पाँच रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती थी, जिसे बढ़ाकर बीस रुपये किया गया और अब चालीस रुपये प्रति गौवंश प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस राशि में से पैंतीस रुपये चारा, भूसा एवं पोषण आहार के लिए तथा पाँच रुपये गौसेवकों के मानदेय के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग पाँच हजार निराश्रित गौवंशों के संरक्षण की व्यवस्था सहज रूप से की जा सकती है। रीवा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि लक्ष्मण बाग में लगभग एक हजार गौवंश संरक्षित हैं, बसामन मामा क्षेत्र में 9 से 10 हजार गौवंशों की व्यवस्था है तथा हिनौतिया गौधाम में लगभग 25 हजार गौवंशों को रखने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उपलब्ध भूमि के समुचित उपयोग से और अधिक सुव्यवस्थित विकास किया जा सकता है।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि केवल सुझाव देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना बनाकर मैदान में उतरना होगा। उन्होंने गौ संरक्षण को प्राकृतिक खेती से जोड़ते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिसका दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। वर्तमान में मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा यकृत संबंधी रोगों की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र भूमि के लिए प्राकृतिक पोषण का स्रोत हैं, जो मिट्टी की सेहत सुधारने में सहायक हैं। यदि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाना है, तो गौ संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।

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