रानी अहिल्याबाई की न्यायप्रियता और लोकसेवा की भावना प्रेरणा का स्त्रोत है – राज्यमंत्री

रानी अहिल्याबाई की न्यायप्रियता और लोकसेवा की भावना प्रेरणा का स्त्रोत है – राज्यमंत्री
हनुमना में स्वसहायता समूह सम्मेलन में मनाई गई अहिल्याबाई की जयंती

रीवा 28 मई 2025. रानी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के कार्यक्रम प्रदेश भर में आयोजित किए जा रहे हैं। इस क्रम में मऊगंज जिले के हनुमना में जनपद पंचायत परिसर में आयोजित महिला स्वसहायता समूह सम्मेलन में रानी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती मनाई गई। समारोह की मुख्य अतिथि नगरीय विकास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने कहा कि रानी अहिल्याबाई की न्यायप्रियता और लोकसेवा की भावना हम सबके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। उनकी अद्वितीय प्रशासनिक क्षमता ने जनकल्याण के नए प्रतिमान गढ़े। रानी अहिल्याबाई भगवान शिव की परमभक्त होने के साथ-साथ कुशल शासिका और रणनीतिकार के रूप में अपनी छाप छोड़ी। उनके 30 वर्ष के शासनकाल में एक भी युद्ध नहीं हुआ और पूरा शासनकाल सुशासन और जनकल्याण के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। रानी अहिल्याबाई ने देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थानों में तीर्थयात्रियों के लिए धर्मशालाओं का निर्माण और बनारस के बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने 250 से अधिक मंदिरों का निर्माण कराया। वह स्वयं दरबार में बैठकर प्रजा की समस्याएं सुनकर तत्काल न्याय करती थीं। उनका जीवन महिला सशक्तीकरण और सुशासन का अनुपम उदाहरण है।
सम्मेलन में राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महिलाओं के कल्याण और सशक्तीकरण के अनेक प्रयास किए हैं। हनुमना में 1200 से अधिक महिला स्वसहायता समूह विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से स्वाबलंबी बने हैं। इनसे जुड़ी महिलाओं का जीवन बेहतर हो रहा है। सरकार महिला स्वसहायता समूहों को मध्यान्ह भोजन निर्माण, गेंहू और धान के उपार्जन, उचित मूल्य दुकानों का संचालन सहित अनेक आर्थिक विकास के अवसर दे रही है। महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सम्मेलन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत ने महिला स्वसहायता समूहों की गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मेलन में वरिष्ठ समाजसेवी डॉ राजेन्द्र मिश्रा, सुश्री सरिता सिंह, सुनील शुक्ला, एसडीएम हनुमना श्रीमती रश्मि चतुर्वेदी तथा बड़ी संख्या में महिलाएं एवं आमजन उपस्थित रहे।

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