ग्रामीण क्षेत्र के विकास में है मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका
ग्रामीण क्षेत्र के विकास में है मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका
ग्रामीण बैंक ने देश के विकास में योगदान देते हुए पूरे किए स्वर्णिम 50 वर्ष
रीवा 04 अक्टूबर 2025. भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सन 1975 से शुरू हुए। देश में 2 अक्टूबर 1975 को प्रथमा ग्रामीण बैंक मुरादाबाद उत्तर प्रदेश सहित पांच क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गई। ग्रामीण बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में बैंकिंग सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत पर छोटे किसानों खेतिहर मजदूरों छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों को बैंकिंग सुविधाओं के साथ-साथ उनकी साख एवं ऋण सुविधाओं को उपलब्ध कराना था। ग्रामीण बैंकों ने 2 अक्टूबर 2025 को देश के विकास में योगदान देते हुए अपने स्वर्णिम 50 वर्ष पूरे किए। ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाओं के विकास, बचत, पूंजी निवेश और गरीबों को शासन की योजनाओं का लाभ देने में ग्रामीण बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण और सराहनीय रही।
ग्रामीण बैंक के विलय के चौथे चरण में भारत के 26 राज्यों दो केंद्र शासित प्रदेश में 43 ग्रामीण बैंक कार्यरत थे जो 1 मई 2025 से 26 राज्य एवं दो केंद्र शासित प्रदेश में विलय के पश्चात 28 ग्रामीण बैंक की 700 जिलों में लगभग 22000 से अधिक शाखाएं कार्यरत हैं। ग्रामीण बैंकों में वर्तमान में लगभग वही सुविधाएं आमजनता को दी जा रही हैं जो राष्ट्रीयकृत बैंकों से प्राप्त होते हैं। ग्रामीण बैंक शासन और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियंत्रण में बैंकिंग व्यवसाय कर रहे हैं। इन 50 वर्षों में ग्रामीण बैंकों के स्थानीय सेवायुक्तों द्वारा अपनी स्थानीय बोली भाषा व्यवहार खान-पान वेशभूषा से स्थानीय गरीब किसान मजदूरों के बीच अच्छी छवि एवं पैठ बनाकर ग्रामीण बैंकों का व्यवसाय उत्तरोत्तर वृद्धि की ओर ले गए वित्तीय वर्ष 2021-22 में ग्रामीण बैंक की कुल जमा राशि 5.62 लाख करोड़ थी जो वित्तीय वर्ष 23 -24 मैं बढ़कर 8.40 लाख करोड़ हो गई वित्तीय वर्ष 2023 24 में बैंक का समेकित शुद्ध लाभ 7571 करोड़ तक पहुंच गया। वर्ष 2022 में कर्मचारियों की संख्या 95833 थी। ग्रामीण बैंकों की वित्तीय सहायता से अल्पकालीन मध्यमकालीन दीर्घकालीन ऋणों के माध्यम से किसान व्यवसायी मजदूर पशुपालकों बकरी पालकों मछली पालकों कपड़ा चमड़ा उद्योग साइकिल रिक्शा वेल्डिंग आदि अनेक गतिविधियों के माध्यम से अपना अपना उत्पादन एवं कारोबार भी बढ़ाकर ग्रामीण आवास एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि की इस हेतु शासकीय योजनाओं यथा आईआरडीपी महिलाओं के समूहों को बनाकर महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इसके लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा भी समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को अनुदान उपलब्ध कराया गया। पात्र हितग्राहियों को हितलाभ, पेंशन तथा कर्मचारियों को वेतन का भुगतान भी ग्रामीण बैंक के खाते से किया जा रहा है। ग्रामीण बैंक के सेवा कर्मियों के अथक परिश्रम के परिणाम स्वरुप ही आज ग्रामीण बैंक की सेवायुक्त स्केल 5 अर्थात सहायक महाप्रबंधक के पद तक पदोन्नत होकर कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष और महाप्रबंधक वाणिज्यिक बैंकों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तक पदोन्नत होकर राष्ट्रीयकृत बैंकों में समतुल्य पदों पर कार्य कर रहे हैं।
सरकार द्वारा 30 अप्रैल 1990 को दिए गए निर्णय अनुसार अपना अवार्ड दिया यह 22 फरवरी 1991 से ग्रामीण बैंक और राष्ट्रीयकृत बैंकों के वेतन, भत्तों एवं अन्य सुविधाओं को समान कर दिया। ग्रामीण बैंक के पेंशन भोगी कर्मचारियों को भी राष्ट्रीयकृत बैंकों के समान पेंशन दी जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में ग्रामीण बैंकों के माध्यम से करोड़ों जनधन खाते खुलवाकर महिला सशक्तिकरण हितग्राहियों को सीधे ट्रांसफर बेनिफिट ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए शत-प्रतिशत कंप्यूटरीकृत बैंकिंग एटीएम नेफ्ट आरटीजीएस नेट बैंकिंग सुविधा ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में अपनी महती भूमिका अदा की है। आज इन बैंकों की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इन बैंकों की उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए सर्वोच्च न्यायालय सहित अन्य न्यायालयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ग्रामीण बैंक आज अपने सफलतम 50 वर्ष पूर्ण कर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है। निश्चित रूप से ग्रामीण बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल रहा।